कोरोना वायरस पर कई स्टडी की जा चुकी हैं. दावे अलग होते हैं, लेकिन इस वायरस के स्वरूप को समझने में मददगार रहते हैं. अब भारत में CSIR ने भी एक स्टडी की है. उन्होंने भी यहीं जानने का प्रयास किया अगर कोरोना हवा के जरिए फैल सकता है या नहीं? अब CSIR की स्टडी बताती है कि हवा के जरिए कोरोना फैल सकता है, लेकिन अगर कमरों में वेंटिलेशन अच्छा रहा तो ये खतरा कम हो सकता है. स्टडी के मुताबिक जिन कमरों में वेंटिलेशन ठीक नहीं रहता, वहां पर कोरोना हवा के जरिए ज्यादा दूर तक ट्रैवल कर सकता है.
स्टडी में ये भी पाया गया है कि नेचुरल एनवायरमेंट कंडीशन में कोरोना वायरस ज्यादा दूर तक नहीं ट्रैवल करता है, वहीं अगर मरीज बिना लक्षणों वाला है, तो ये खतरा और ज्यादा कम हो सकता है. लेकिन स्टडी में सबसे ज्यादा जोर कोरोना के इनडोर ट्रांसमिशन पर दिया गया है. जानने का प्रयास रहा है कि बंद कमरों में कोरोना हवा के जरिए फैल सकता है या नहीं. अब स्टडी में दो पहलुओं पर फोकस किया गया है. पहला पहलू ये है कि अगर कमरों में खिड़कियों को खोल दिया जाए तो कोरोना ट्रांसमिशन को कम किया जा सकता है. सिर्फ वेंटिलेशन पर ध्यान देने से ही खतरे को आधा किया जा सकता है.
स्टडी में क्या निकल कर आया?
स्टडी में दूसरा पहलू इस बात को लेकर है कि बंद कमरो में कोरोना फैलने का खतरा कब ज्यादा हो सकता है. बताया गया है कि अगर बंद कमरे में कोविड के ज्यादा मरीज हैं तो हवा के जरिए भी दूसरा शख्स संक्रमित हो सकता है. दरअसल CSIR ने कोविड और गैर कोविड, ICU और नॉन ICU रूम की हवा के सैंपल का टेस्ट किया था. फिर इसका बंद कमरे में मौजूद कोविड मरीजों पर प्रयोग हुआ. अब इस टेस्ट के जरिए यही पाया गया कि अगर बंद कमरे में ज्यादा कोविड पॉजिटिव मरीज हैं, तो हवा के जरिए दूसरे तक संक्रमण पहुंचने की गुंजाइश ज्यादा रहती है. लेकिन वहीं अगर कमरे का वेंटिलेशन ठीक कर लिया जाए, तो उस खतरे को भी कम किया जा सकता है.
मिलन शर्मा