'हमें अपने संविधान पर गर्व', नेपाल में चल रही उथल-पुथल पर CJI बीआर गवई की टिप्पणी

सीजेआई बीआर गवई ने नेपाल में हालात पर चिंता जताई. पांच जजों की संविधान पीठ की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व है और पड़ोसी देशों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. गवई हाल ही में नेपाल की यात्रा पर गए थे और वहां उन्होंने नेपाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी.

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नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रोटेस्ट में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाए (Photo: AP) नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रोटेस्ट में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा दिया जाए (Photo: AP)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 10 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:19 PM IST

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में उथल-पुथल मची हुई है. नेपाल के हालात पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई ने चिंता व्यक्त की. 5 जजों की संविधान पीठ राष्ट्रपति और राज्यपालों के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मसले पर सुनवाई कर रही थी, इसी दौरान सीजेआई ने कहा कि हमें अपने संविधान पर गर्व है, देखिए हमारे पड़ोसी देशों में क्या हो रहा है. नेपाल में भी हमने हालात को देखा है. जस्टिस विक्रमनाथ ने भी कहा कि बांग्लादेश में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई थी.

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बता दें कि पिछले हफ्ते ही चीफ जस्टिस बीआर गवई नेपाल की यात्रा पर गए थे. वहां उन्होंने नेपाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश मानसिंह राउत से मुलाकात की थी. इसके अलावा, उन्होंने भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में दर्शन पूजन भी किया और दीप जलाकर शांति की कामना की थी.

नेपाल में युवा प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री केपी ओली सरकार को हटाने के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक सुधारों की मांग रख दी है.ये प्रदर्शनकारी व्यापक प्रशासनिक सुधार और पिछले तीन दशकों में भ्रष्ट राजनीति द्वारा लूटी गए संपत्ति की जांच की मांग कर रहे हैं.

आंदोलन के आयोजकों ने घोषणा की है कि जो लोग प्रदर्शन के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं, उन्हें राज्य द्वारा शहीद का दर्जा दिया जाए. इनके परिवारों को सम्मान, सरकारी राहत और मान्यता दी जाएगी.

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युवा नेताओं ने बेरोजगारी कम करने, लोगों की बढ़ती प्रवास समस्या को रोकने और सामाजिक अन्याय के खिलाफ विशेष कार्यक्रम चलाने का वादा किया है. उन्होंने कहा कि ये कदम देश में लोकतंत्र को मजबूत करने और आम जनता के हक़ की रक्षा करने के लिए उठाए जा रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि ये आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और राष्ट्र के भविष्य के लिए है. शांति जरूरी है, लेकिन यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है.

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