देश के प्रमुख संस्थानों और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा में अपना लोहा मनवाने वाला केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF अब देश के बंदरगाहों की सुरक्षा का जिम्मा उठाएगा. संसद भवन परिसर से लेकर हवाई अड्डों तक की सुरक्षा का जिम्मा उठा रहे सीआईएसएफ को बंदरगाहों की सुरक्षा सौंपने का फैसला अब सरकार ने कर लिया है.
गृह मंत्री अमित शाह ने सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस पर ओडिशा के मुंडली में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में किया. अमित शाह इस कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि वीरता, त्याग और बलिदान की पर्याय सीआईएसएफ आधुनिकता को अपनाकर देश की सुरक्षा की ढाल बनी है.
गृह मंत्री शाह ने कहा कि अपनी स्थापना के 56 वर्ष पूरे कर औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में शून्य से शिखर तक पहुँचने वाली सीआईएसएफ के बिना भारत के औद्योगिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने 2047 तक देश को पूरी तरह विकसित बनाने का जो लक्ष्य रखा है, उसमें सीआईएसएफ कैटेलिस्ट की भूमिका निभा रही है.
अमित शाह ने कहा कि तिरुपति से पशुपतिनाथ तक रेड कॉरिडोर का सपना देखने वाले नक्सलियों को 31 मार्च 2026 तक हमारे सुरक्षा बल पूरी तरह परास्त कर देंगे. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को अंत की कगार पर लाने में सीआईएसएफ की अहम भूमिका रही है. अमित शाह ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने सीआईएसएफ को ड्रोन सुरक्षा की नोडल एजेंसी बनाया है.
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उन्होंने कहा है कि सीआईएसफ आने वाले दिनों में निजी औद्योगिक समूहों को भी हाइब्रिड मोड में सुरक्षा देगी. अमित शाह ने 890 करोड़ रुपये की लागत से सीआईएसएफ से जुड़े पांच आवासीय परिसरों का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया,उन्होंने जिन तीन आवासीय परिसरों का शिलान्यास किया, उनमें कामरूप, नासिक और सीहोर के आवासीय परिसर शामिल हैं.
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गृह मंत्री ने राजरहाट और दिल्ली में सीआईएसएफ के नवनिर्मित आवासीय परिसरों का लोकार्पण भी किया. इस मौके पर सीआईएसएफ भारत के 70 हवाई अड्डों सहित 361 महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही है.
जितेंद्र बहादुर सिंह