सैटेलाइट ने द‍िखाया चीन का नया निर्माण, क्या भारत को सतर्क रहने की जरूरत? 

1962 की जंग के बाद से चीन ने इस क्षेत्र में नियंत्रण बनाए रखा है, जबकि भारत इसे अपना हिस्सा मानता है. दिसंबर 2025 की इमेज में नए निर्माण स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं, जो चीन की रणनीतिक सैन्य स्थिति को मजबूत करते हैं. भारत और चीन के बीच तनाव कम होने के बावजूद, चीन की ये गतिविधि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.

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भारत-चीन डिसएंगेजमेंट के बावजूद चीन ने पंगोंग झील पर नया सैन्य कब्जा बढ़ाया (Satellite image @ 2024 Maxar Technologies via India Today) भारत-चीन डिसएंगेजमेंट के बावजूद चीन ने पंगोंग झील पर नया सैन्य कब्जा बढ़ाया (Satellite image @ 2024 Maxar Technologies via India Today)

अंकित कुमार

  • नई दिल्ली ,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

नई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि चीन, पंगोंग त्सो के विवादित पूर्वी लद्दाख इलाके में अपनी स्थायी सैन्य मौजूदगी को बढ़ा रहा है. चीन ने 1962 की जंग के बाद से इस क्षेत्र में सिरीजाप पोस्ट के पास नियंत्रण रखा है जबकि भारत इसे अपना हिस्सा मानता है. इमेज में साफ दिख रहा है कि झील के किनारे नई इमारतों का एक बड़ा परिसर बन रहा है. इसका मतलब है कि चीन अपनी सेना और संसाधनों को बफर जोन के पास और करीब रख सकेगा.

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पंगोंग झील के पास चीन का नया निर्माण, दिसंबर 2026. इमेज: India Today OSINT

इलाका और पृष्ठभूमि

2013 में चीन ने इस इलाके में सड़क नेटवर्क बनाया था, जो पहले दोनों देशों के पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल होता था. मई 2020 के स्टैंडऑफ के बाद, भारतीय पेट्रोलिंग को यहां प्रवेश नहीं मिला. 2020 से चीन ने अस्थायी संरचनाएँ बनाई थीं, जिनमें सैनिकों के लिए रहने की व्यवस्था, नावें और एक पियर्स शामिल थे.

सैटेलाइट इमेज में पुराने अस्थायी और नए निर्माण दिख रहे हैं. इमेज: Vantor 2026

हालिया निर्माण गतिविधि

दिसंबर 2025 की इमेज से पता चलता है कि निर्माण का काम तेज हो गया है. नई इमारतें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं. नावें पियर्स से हटा दी गई हैं, संभवतः झील के जमने की वजह से.

पंगोंग झील के किनारे नए स्थायी निर्माण स्थल की सैटेलाइट इमेज. (Image: Vantor 2026)

राजनीतिक और सैन्य महत्व

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भारत और चीन के रिश्ते पिछले साल थोड़े बेहतर हुए. प्रधानमंत्री मोदी ने SCO समिट के लिए चीन का दौरा किया और सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुईं. दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले पॉइंट्स से 'डिसएंगेज' किया. लेकिन चीन का असली इरादा और भविष्य की रणनीति अब भी सवालों के घेरे में है.

जियोस्पेशियल रिसर्चर डेमियन सायमन कहते हैं कि चीन का ये निर्माण दिखाता है कि वो स्थायी संरचनाएं बनाकर क्षेत्र में नियंत्रण मजबूत करना चाहता है. ये स्थल 2020 के डिसएंगेजमेंट जोन के ठीक बाहर है और चीन को साल भर ऑपरेशन करने में मदद करेगा. ये कदम भारत के दावों को कमजोर करता है और लंबे समय तक अपनी मौजूदगी जताने का संकेत देता है.

पिछले निर्माण और सुरक्षा सुविधाएं

पहले की रिपोर्ट में दिखाया गया था कि चीन ने एयर डिफेंस साइट्स बनाई हैं, जिनमें ट्रांसपोर्टर एरेक्टर लॉन्चर (TEL) वाहनों के लिए कवर और छतें हैं.

विवादित इलाके के पास एक और बड़ा निर्माण भी हो रहा है, जिसे कई लोग ड्यूल-यूज सुविधा मानते हैं.

भारत-चीन बैठकें और संपर्क

भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 तक WMCC और SHMC मीटिंग्स के जरिए एलएसी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की. डिसएंगेजमेंट के बाद दोनों देशों ने कई अन्य बैठकें कीं जिसमें लोगों के लिए यात्रा, सीधी उड़ानें, नदी और 75वीं वार्षिक कूटनीतिक संबंधों की गतिविधियों पर जोर दिया गया.

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