कौन हैं सौरभ जोशी? जो चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव में मार ले गए बाजी, AAP और कांग्रेस को दी शिकस्त

Saurabh Joshi Chandigarh Mayor: चंडीगढ़ मेयर चुनाव में BJP के सौरभ जोशी विजयी हुए. 1996 के बाद पहली बार हाथ उठाकर हुई वोटिंग में उन्हें 18 वोट मिले, जबकि AAP और कांग्रेस के वोट बंट गए. जानिए सौरभ जोशी के बारे में...

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त्रिकोणीय मुकाबले में सौरभ जोशी मेयर घोषित.(Photo:Saurabh Joshi) त्रिकोणीय मुकाबले में सौरभ जोशी मेयर घोषित.(Photo:Saurabh Joshi)

कमलजीत संधू

  • चंडीगढ़,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST

चंडीगढ़ नगर निगम में गुरुवार को भारी गहमागहमी और ऐतिहासिक बदलावों के बीच BJP के सौरभ जोशी नए मेयर चुन लिए गए हैं. 1996 के बाद पहली बार हाथ उठाकर हुई वोटिंग ने इस चुनाव को पारदर्शी और यादगार बना दिया.

43 साल के सौरभ जोशी चंडीगढ़ की राजनीति का एक जाना-माना और प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं. पेशे से एडवोकेट सौरभ ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ABVP यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी.

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वह एक सम्मानित राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता दिवंगत जय राम जोशी 1990 के दशक में चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष थे. सौरभ जोशी वरिष्ठ भाजपा नेता विनीत जोशी के भाई हैं. 

वार्ड नंबर 12 से आने वाले सौरभ के कार्यक्षेत्र में चंडीगढ़ के अहम सेक्टर 15, 16, 17 और 24 आते हैं. वे नगर निगम हाउस की बैठकों में अपनी सक्रियता और नागरिक मुद्दों मसलन कचरा प्रबंधन, पार्किंग जैसों मामलों में हैं. 
 
सौरभ जोशी खुद को सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि जनता का सेवक मानते हैं. वे अक्सर संख्या बल से ऊपर उठकर जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देने की बात करते हैं.

मेयर निर्वाचित होने के बाद वे भावुक नजर आए और अपने पिता की तस्वीर थामे हुए अपनी सफलता को उन्हें समर्पित किया. हर के सौंदर्यकरण, स्वच्छता रैंकिंग में सुधार और निगम के वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करना उनके कार्यकाल के मुख्य लक्ष्य माने जा रहे हैं. 

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सौरभ जोशी ऐसे समय में मेयर बने हैं जब चंडीगढ़ नगर निगम में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'सीक्रेट बैलेट' (गुप्त मतदान) के बजाय सार्वजनिक रूप से हाथ उठाकर वोटिंग की नई एसओपी (SOP) लागू की गई थी. 

सौरभ ने कुल 18 वोट हासिल किए. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी (AAP) योगेश ढींगरा को 11 वोट मिले. वहीं, कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गाबी को 7 वोट से संतुष्टि करनी पड़ी.  

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