चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला, पंजाब और हरियाणा का डेपुटेशन कोटा खत्म

27 मई को चीफ सेक्रेटरी राजीव वर्मा की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन पंजाब और हरियाणा के डेपुटेशन कोटा को खत्म कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि उन्होंने फैसला आने वाले वक्त को ध्यान में रखते हुए लिया है.

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चंडीगढ़ प्रशासन ने खत्म किया पंजाब-हरियाणा का डेपुटेशन कोटा. (सांकेतिक फोटो) चंडीगढ़ प्रशासन ने खत्म किया पंजाब-हरियाणा का डेपुटेशन कोटा. (सांकेतिक फोटो)

कुमार अभिषेक

  • चंडीगढ़,
  • 28 मई 2025,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

चंडीगढ़ प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पंजाब और हरियाणा के लिए डेपुटेशन कोटा खत्म कर दिया है. 27 मई को चीफ सेक्रेटरी राजीव वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सभी विभाग निदेशक और सचिव को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चंडीगढ़ प्रशासन में कार्यरत सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के डेपुटेशन नियमों के अनुसार ही सुविधा दी जाएगी. अब पंजाब और हरियाणा के लिए कोई फिक्स कोटा नहीं होगा.

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नए निर्देशों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर आए कर्मचारियों और अधिकारियों को केंद्र के नियमों के तहत 3 से 5 वर्ष की अवधि के बाद अपनी मूल यूनिटों में वापस जाना होगा. 

गौरतलब है कि चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग में 4,515 पदों में से 820 शिक्षक पद और स्वास्थ्य विभाग में 164 मेडिकल ऑफिसर पदों में से 98 पद डेपुटेशन कोटे के तहत आरक्षित थे. इन पदों पर लंबे समय से पंजाब और हरियाणा के कर्मचारी और अधिकारी डेपुटेशन कोटे का हवाला देकर नियुक्त होते रहे हैं.

वक्त पर नहीं हो पा रहीं थीं भर्तियां

इस कोटे की वजह से शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में न तो वक्त पर भर्तियां हो पा रही थीं और न ही प्रमोशन की प्रक्रिया प्रभावी रूप से चल पा रही थी. डेपुटेशन कोटे के कारण चंडीगढ़ कैडर के कर्मचारियों को नियमित भर्ती और प्रमोशन में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था. अब नए निर्देशों के बाद चंडीगढ़ कैडर के तहत भर्ती होने वाले डॉक्टरों और शिक्षकों के लिए नियमित प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है.

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चंडीगढ़ प्रशासन का यह कदम लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे न केवल स्थानीय कैडर को मजबूती मिलेगी, बल्कि विभागों में कार्यकुशलता भी बढ़ेगी. इस फैसले से पंजाब और हरियाणा के कर्मचारियों के बीच कुछ असंतोष की संभावना जताई जा रही है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये फैसला आने वाले वक्त को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

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