केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को लागू करने के लिए मसौदा नियम जारी किए हैं. इन नियमों का मकसद गिग और प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों को बेहतर सुरक्षा देना है. इसके तहत उन्हें न्यूनतम मजदूरी, इलाज की सुविधा, सुरक्षित कामकाजी माहौल और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकार मिलेंगे.
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने जिन चार श्रम संहिताओं के नियम जारी किए हैं, उनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 शामिल हैं. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब गिग कामगार वेतन, काम की हालत और सुरक्षा को लेकर देशभर में हड़ताल कर रहे थे.
एक ही कंपनी के साथ 90 दिन का काम जरूरी
मसौदा नियमों के मुताबिक, गिग कामगार तब इन सुविधाओं के हकदार होंगे, जब उन्होंने पिछले वित्त वर्ष में किसी एक कंपनी के साथ कम से कम 90 दिन काम किया हो. अगर उन्होंने अलग-अलग कंपनियों के साथ काम किया है, तो कुल 120 दिन का काम पूरा होना जरूरी होगा. इससे यह साफ हो जाएगा कि कौन कामगार सुविधाओं के दायरे में आएगा.
नियम होंगे और भी ज्यादा स्पष्ट
इन श्रम संहिताओं में पहली बार गिग वर्क, प्लेटफॉर्म वर्क और काम देने वाली कंपनियों की साफ परिभाषा तय की गई है. साथ ही एक सामाजिक सुरक्षा कोष बनाने की बात कही गई है, जिससे कामगारों को जीवन बीमा, दिव्यांगता सहायता, इलाज और मैटरनिटी से जुड़ी सुविधाएं मिल सकेंगी.
अगर कोई कामगार एक से ज्यादा कंपनियों के साथ काम करता है, तो उसके सभी काम के दिनों को जोड़कर गिना जाएगा. एक ही दिन में अलग-अलग कंपनियों के लिए किया गया काम भी अलग-अलग दिन माना जाएगा.
100 करोड़ कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक 100 करोड़ कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का है. अभी करीब 94 करोड़ लोग इसमें शामिल हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 में सिर्फ 19 प्रतिशत कामगारों को यह सुरक्षा मिलती थी, जो 2025 में बढ़कर 64 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है.
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