CBI यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो ने शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया. पहला DGCA यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय का एक बड़ा अधिकारी और दूसरा एक बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट. आरोप है कि ड्रोन इम्पोर्ट की परमिशन दिलाने के बदले 2.5 लाख रुपये की रिश्वत ली गई. CBI ने इनके घरों और दफ्तरों पर छापे मारे तो 37 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के सिक्के और कई डिजिटल डिवाइस भी मिले.
पहले गिरफ्तार शख्स का नाम मुदावत देवुला है. वो DGCA के एयरवर्थनेस डायरेक्टरेट में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर काम करते थे. यह एक बहुत बड़ा सरकारी पद है. एयरवर्थनेस का मतलब होता है यह तय करना कि कोई विमान या ड्रोन उड़ान के लिए सुरक्षित है या नहीं. दूसरे गिरफ्तार शख्स का नाम भरत माथुर है. वो एक बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट है और एक एयरोस्पेस कंपनी से भी जुड़ा हुआ है जो ड्रोन इम्पोर्ट के कारोबार में है.
रिश्वत का खेल कैसे चलता था?
CBI के मुताबिक मुदावत देवुला अपने सरकारी पद का फायदा उठाकर प्राइवेट कंपनियों से पैसे मांगते थे. एक प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनी के ड्रोन इम्पोर्ट से जुड़े कई आवेदन DGCA में लंबे समय से अटके पड़े थे. इन आवेदनों पर मंजूरी और परमिशन दिलाने के बदले उन्होंने रिश्वत मांगी.
भरत माथुर उस प्राइवेट कंपनी की तरफ से बीच का आदमी यानी बिचौलिए की भूमिका में था. उसने DGCA अधिकारी और प्राइवेट कंपनी के बीच रिश्वत की यह डील करवाई.
CBI ने कैसे पकड़ा?
CBI ने शनिवार को एक ट्रैप ऑपरेशन चलाया. जब रिश्वत के 2.5 लाख रुपये हाथ से हाथ में जा रहे थे तब CBI ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया. पूरी रकम यानी 2.5 लाख रुपये मौके पर ही जब्त कर ली गई.
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छापेमारी में क्या मिला?
गिरफ्तारी के बाद CBI ने दिल्ली में चार जगहों पर छापे मारे. इनमें गिरफ्तार सरकारी अधिकारी और दूसरे प्राइवेट लोगों के घर और दफ्तर शामिल थे. छापेमारी में जो चीजें मिलीं वो चौंकाने वाली थीं. 37 लाख रुपये नकद मिले, सोने और चांदी के सिक्के मिले और कई डिजिटल डिवाइस जैसे मोबाइल, लैपटॉप वगैरह जब्त किए गए. इन डिवाइस से रिश्वत के और सबूत मिल सकते हैं.
यह मामला इतना अहम क्यों है?
भारत इन दिनों ड्रोन इंडस्ट्री को बहुत तेजी से बढ़ावा दे रहा है. सरकार ने ड्रोन नीति बनाई है, ड्रोन के इस्तेमाल को खेती से लेकर डिलीवरी तक फैलाया जा रहा है. ऐसे में जिस सरकारी अधिकारी के हाथ में इस पूरी इंडस्ट्री की मंजूरी देने की ताकत थी, वही रिश्वत लेते पकड़ा गया. यह सिस्टम में बड़ी खामी की तरफ इशारा करता है.
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