'मनोबल पर पड़ेगा विपरीत असर', CAPF रेगुलेशन बिल के खिलाफ पूर्व अधिकारी

अर्धसैनिक बलों के अधिकारी प्रस्तावित सीएपीएफ रेगुलेशन बिल के खिलाफ खुलकर उतर आए हैं. पूर्व अधिकारियों ने यह बिल गृह विभाग की स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग की है.

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पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरनाक (Photo: ITG) पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरनाक (Photo: ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:40 PM IST

सरकार सीएपीएफ रेगुलेशन बिल लाने की तैयारी में हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी. अब इस बिल के खिलाफ अब ऑल एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन (AAPWA) ने मोर्चा खोल दिया है. एसोसिएशन ने प्रस्तावित सीएपीएफ रेगुलेशन बिल को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं. इन पूर्व अधिकारियों का कहना है कि इस विधेयक से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों-कर्मचारियों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ सकता है.

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एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि इस विधेयक से बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी के लगभग 12 हजार 500 अधिकारियों और उनके अधीन कार्यरत करीब 10 लाख कर्मचारियों की नेतृत्व संरचना, सेवा शर्तों और मनोबल को प्रभावित कर सकता है. अर्धसैनिक बलों के इन पूर्व अधिकारियों का कहना है कि सीएपीएफ देश की सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ अभियानों के साथ ही आपदा प्रबंधन में अग्रिम भूमिका निभाते हैं.

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि ऐसे में इनके नेतृत्व ढांचे में किसी भी प्रकार का असंतुलन सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है. वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संसदीय समितियों और वेतन आयोग की पूर्व टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीएपीएफ में पदोन्नति में देरी, सीमित नेतृत्व अवसर और संरचनात्मक असमानताएं पहले से ही चिंता का विषय रही हैं. साल 2019 में सीएपीएफ अधिकारियों को संगठित ग्रुप A सर्विस (OGAS) का दर्जा दिया गया था.

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पूर्व अधिकारियों के मुताबिक इसे साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी मान्यता दी थी. कैबिनेट ने इसे अनुमोदित भी कर चुकी है, फिर इसके कार्यान्वयन में देरी का क्या तुक है. इन निर्णयों का पूर्ण क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है.प्रस्तावित विधेयक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के प्रभाव को कम कर सकता है और इससे मौजूदा असंतुलन भी और अधिक बढ़ सकता है. पूर्व अधिकारियों ने यह बिल गृह विभाग की स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग की है.

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इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद, एचआर सिंह, पूर्व आईजी एमएस मल्ही, आईटीबीपी के पूर्व एडीजी एसके चौधरी, एसएसबी के पूर्व आईजी विकास चंद्रा और बिनोद नायक, सीआरपीएफ के पूर्व आईजी केके शर्मा और एसएसबी के पूर्व आईजी पीके गुप्ता मौजूद थे.

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