प्रेग्नेंसी के 35वें सप्ताह में गर्भपात की मिली अनुमति, कोलकाता हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि महिला राज्य सरकार के द्वारा संचालित SSKM अस्पताल के डॉक्टरों की टीम से गर्भपात करा सकती है. लेकिन गर्भपात के दौरान होने वाली किसी भी जटिलता (Complication) की जिम्मेदारी उसकी ही होगी.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 18 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST
  • कोर्ट ने कहा- जटिलता होने पर जिम्मेदारी महिला की होगी
  • राज्य सरकार के SSKM अस्पताल में गर्भपात कराने की मंजूरी

गर्भपात से जुड़े एक मामले में कोलकाता हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने प्रेग्नेंसी के 35वें हफ्ते में 36 वर्षीय गर्भवती महिला को गर्भपात कराने की मंजूरी दे दी है. देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी कोर्ट ने 35 सप्ताह की गर्भावस्था को खत्म करने की अनुमति दी है. कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाया है. गर्भपात के लिए महिला और उसके पति की तरफ से कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.

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न्यायमूर्ति राजशेखर मथा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा कि महिला राज्य सरकार के द्वारा संचालित SSKM अस्पताल के डॉक्टरों की टीम से गर्भपात करा सकती है. लेकिन गर्भपात के दौरान होने वाली किसी भी जटिलता (Complication) की जिम्मेदारी उसकी ही होगी.

इस मामले पर कोर्ट ने SSKM अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम का गठन किया था. टीम ने महिला की जांच कर कोर्ट के सामने मेडिकल रिपोर्ट पेश की थी. रिपोर्ट में बताया गया था कि किसी भी हालत में बच्चे की सामान्य डिलिवरी नहीं कराई जा सकती. मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा था कि किसी तरह बच्चा जन्म भी ले लेता है तो वह सामान्य जिंदगी नहीं जी सकेगा.

24 हफ्ते के बाद नहीं होती गर्भपात की इजाजत

इससे पहले 4 जनवरी 2022 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस तरह का एक फैसला सुनाया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 सप्ताह की प्रेग्नेंसी के गर्भपात की इजाजत दी थी. भ्रूण की गंभीर असामान्यताओं के चलते ऐसा फैसला दिया गया था. इन असामान्यताओं की वजह से पैदा होने वाले नवजात को कई सर्जरीज से गुजरना पड़ता है, जो बहुत पीड़ादायक होता है. दरअसल, Medical Termination of Pregnancy (MTP) एक्ट के मुताबिक, 24 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं होती है.

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रिपोर्ट- ऋतिक मंडल

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