छत्तीसगढ़ में बीजेपी कैसे कांग्रेस से एक कदम आगे निकल गई?

छत्तीसगढ़ में BJP का मैनिफेस्टो देख क्या कांग्रेस चिंतित होगी, इलेक्टोरल बॉन्डस पर चली सुनवाई का निचोड़ क्या रहा, क्या है राजस्थान का जल जीवन मिशन घोटाला, दिल्ली में क्या प्रदूषण को रोकने में फेल हुई राज्य सरकार, सुनिए 'दिन भर' में.

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चेतना काला

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  • 03 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 8:10 PM IST

होड़ एक दूसरे को पछाड़ आगे निकलने की ठीक है लेकिन इस हद तक कि वोटिंग के तीन दिन पहले मतदाताओं को ये न मालूम हो कि जो चुनाव में दावेदार हैं, उनके घोषणापत्र में क्या है, ये भारतीय राजनीति ही में मुमकिन है. छत्तीसगढ़ में पहले चरण का मतदान 7 तारीख़ को है लेकिन आज दोपहर तलक बीजेपी और कांग्रेस पहले-आप, पहले-आप वाले मोड में थे. इसलिए कि बाद में मैनिफेस्टो रिलीज़ करने वाला कहीं बढ़त न ले जाए. ख़ैर, आज भारतीय जनता पार्टी ने असमंजस की स्थिति को तोड़ा. गृहमंत्री अमित शाह राजधानी रायपुर पार्टी का घोषणा पत्र, जिसे पार्टी संकल्प पत्र कहती है, वह लेकर पहुंचे. कहा, इसमें कानून व्यवस्था से लेकर विकास तक की सारी बातें हैं. बीजेपी के घोषणा पत्र समिति के संयोजक थे विजय बघेल. उन्होंने बताया 3 अगस्त से 3 नवम्बर के बीच इसे तीन महीने में तैयार किया गया है. इसमें 35 सदस्य थे. और 2 लाख से ज़्यादा सुझाव को मथ कर इसके एजेंडा को फाइनल किया गया है.  बीजेपी के 'संकल्प पत्र' की बड़ी बातें जो थी. उनमें विवाहित महिला को हर साल 12 हजार रुपए, तेंदूपत्ता की 5500 रुपए प्रति बोरे खरीदी, 500 रुपये में गैस कनेक्शन, गरीब लोगों को रामलला दर्शन योजना का वादा है. बीजेपी के मैनिफेस्टो पर विस्तार से बातचीत, सुनिए 'दिन भर' में. 

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ये तो बात हुई एक दल के मैनिफेस्टो की. राजनीतिक दल जब चुनावों में व्यस्त थे. इसी समय इन दलों को मिलने वाले चंदे का हिसाब-किताब सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था. इलेक्टोरल बॉन्ड की वैधता पर बीते तीन दिन ऊपरी अदालत में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई के बाद कल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. 2018 में सरकार इलेक्टोरल बॉन्डस को फाइनेंस एक्ट के ज़रिए  लेकर आई. दावा था कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी. कानून में व्यवस्था है कि कोई भी आम शख़्स या कॉरपोरेट कंपनी या संस्थाएं बॉन्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को चंदे के तौर पर दे सकती हैं और फिर वे इसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में भुना लेंगे.
लेकिन कुछ संस्थाओं ने ऐतराज़ जताया कि यह स्कीम इनडायरेक्ट ब्राईबरी यानी अप्रत्यक्ष तौर पर रिश्वत की तरह है. जहां सिर्फ़ रूलिंग पार्टी को यह मालूम होता है कि किसको कितना चंदा मिला. ना तो जनता, ना ही विपक्ष जान पाता है कि ये पैसा कौन दे रहा है. अब सुप्रीम कोर्ट में ये कानून दुरुस्त है या नहीं, इस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है. तीन दिनों तक चली सुनवाई में किस पक्ष की क्या दलीलें रहीं, सुनिए 'दिन भर' में.

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिस केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी, इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट को टिड्डी दल कहा था. वह आज फिर से एक मामले के सिलसिले में राजस्थान पहुंची. राजस्थान में भी इसी महीने 25 तारीख़ को विधानसभा चुनाव की वोटिंग होनी है.
इससे पहले ईडी के इस एक्शन को मुख्यमंत्री गहलोत ने घिनौनी राजनीति कहा. जिस मामले की तफ़्तीश के लिए ईडी आज पहुंची, वह था कथित जल जीवन मिशन घोटाला. ईडी की टीम ने आज राजस्थान में 25 जगहों पर छापेमारी की. कहा जा रहा है कि इस स्कीम में गड़बड़ी को लेकर छानबीन हो रही है. जहां छापेमारी हुई, उसमें आईएएस सुबोध अग्रवाल के ठिकाने भी शामिल थे. कुछ दिन पहले ही ईडी ने अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को भी पेश होने का समन जारी किया था. साथ ही, कांग्रेस प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा के जयपुर आवास पर छापेमारी भी की थी. जो जल जीवन मिशन आज चर्चा में रहा, वो क्या है, किस तरह की अनियमितता के आरोप हैं, सुनिए 'दिन भर' में.

चेहरे पे सारे शहर के गर्द-ए-मलाल है
जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है

शे'र की अच्छी बात ये है कि जब पढ़ो कुछ नया लगता है. और दिल्ली-एनसीआर की बुरी बात ये है कि हर बरस ठंड की आहट के साथ ये कोहरे और धुंध की चादर में कम… गर्द और प्रदूषण के चादर में अधिक लिपट जाती है और शे'र में कहे गए पहलू को सच कर जाती है. दिवाली, पटाखे और प्रदूषण संग ही दिल्ली में वैसे आते हैं. लेकिन इस साल पॉल्यूशन थोड़ा पहले ही आ गया है. इंडिया गेट, अक्षरधाम, रोहिणी, आनंद विहार समेत दिल्ली के 13 इलाकों का AQI यानी हवा की गुणवत्ता आज सुबह 400 के पार थी. खराब एयर क्वालिटी देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट ने दिल्ली-NCR में GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का थर्ड स्टेज आज लागू किया है. GRAP का स्टेज III तब लागू किया जाता है जब AQI 401 से 450 की सीमा में पहुंच जाता है. इसके बाद गैर-जरूरी निर्माण-तोड़फोड़ और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल पर रोक लग गई है. BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल कार्स के इस्तेमाल पर सरकार ने 20 हजार रुपए चालान काटने को कहा है.दिल्ली सरकार एक महीने पहले से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है और अपनी तैयारियों के बारे में बता रही है. लेकिन क्या अब उनकी प्लानिंग पूरी तरह फेल नज़र आ रही, सुनिए 'दिन भर' में.

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