आज का दिन: यूपी में अपनी 2017 की ही स्ट्रेटेजी के तहत चुनाव लड़ने जा रही बीजेपी? क्या हैं समीकरण

2017 यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 312 सीटें जीती थीं. वोट परसेंट रहा था 40 पर्सेंट.  वहीं दूसरी ओर बसपा और सपा को मिलाकर कुल वोट प्रतिशत था 44 फीसदी. और सीटें मिली थीं 66. यानि सपा और बसपा का वोट प्रतिशत बीजेपी से बस 4 फीसदी ज्यादा था, मगर इसके बाद भी सीटों का आंकड़ा बीजेपी से बहुत कम था.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 9:20 AM IST

2017 यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 312 सीटें जीती थीं. वोट परसेंट रहा था 40 पर्सेंट. वहीं दूसरी ओर बसपा और सपा को मिलाकर कुल वोट प्रतिशत था 44 फीसदी. और सीटें मिली थीं 66. यानि सपा और बसपा का वोट प्रतिशत बीजेपी से बस 4 फीसदी ज्यादा था, मगर इसके बाद भी सीटों का आंकड़ा बीजेपी से बहुत कम था. तो ऐसा क्यों? इसको समझने के लिए हमें यूपी के जातीय समीकरण को समझना पड़ेगा. यूपी में ओबीसी की कुल आबादी है- 39 फीसदी, एससी-एसटी की आबादी है 20 फीसदी, मुस्लिम हैं- 19 फीसदी और बाकी जनरल कास्ट्स 25 फीसदी की आबादी में आते हैं. 

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2017 यूपी चुनाव में बीजेपी ने प्रदेश के 60 फीसदी वोट को टारगेट किया था. 22 फीसदी जनरल कास्ट, 33 फीसदी नॉन यादव ओबीसी और 7-10 फीसदी नॉन जाटव दलित. इसका नतीजा ये था कि ओबीसी और एससी-एसटी जो प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा हैं, उसका ज्यादातर वोट बीजेपी के हिस्से में चला गया था. वहीं, 19 फीसदी मुस्लिम वोट, सपा-कांग्रेस और बसपा में डिवाइड हो गया था और यही 2017 में बीजेपी की जीत का कारण था.  

खैर, ये तो 2017 की चुनावी गणित थी. अगले महीने की 10 तारीख से यूपी चुनाव होने वाले हैं और पार्टियां वापस से इसी कास्ट गणित के जोड़ घटाव में लग गई हैं. हाल ही यूपी चुनाव के पहले चरण को लेकर बीजेपी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, जिसमें 60 फिसदी टिकट ओबीसी और एससी समुदाय के उम्मीदवारों को दिए गए हैं, जिसके बाद से ये बहस तेज हो गई है कि क्या बीजेपी वापस से 2017 की ही स्ट्रेटेजी के तहत 2022 का चुनाव लड़ने जा रही है या कोई फेर बदल देखने मिल रहा है? क्या इसे सपा की स्ट्रेटेजी कह सकते हैं जिससे वो दलित और ओबीसी समाज को दिखाना चाहती है कि बीजेपी उनकी हितैषी नहीं है?

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देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के करीब पौने 3 लाख नए मामले सामने आए हैं. सबसे ज्यादा चिंता अब केरल को लेकर है जहां एक दिन में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 15% का इजाफा हुआ है. वहीं, ऐसे मरीज 20% बढ़े हैं, जिन्हें ऑक्सीजन बेड्स की जरूरत है. दूसरी ओर न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से कहा कि केंद्र सरकार के एक्सपर्ट पैनल ने कोवीशील्ड और कोवैक्सिन को खुले बाजार में बेचने की सिफारिश की है. बहरहाल, आपको अगर याद हो तो ओमिक्रॉन का पीक सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था जहां अब स्थिति नार्मल है. वहीं से ओमिक्रॉन को लेकर एक स्टडी सामने आई है. दक्षिण अफ्रीका में हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन संक्रमण और इम्यूनिटी से जुड़ी रिसर्च की. रिसर्च में कहा गया कि डेल्टा की चपेट में आए लोगों को ओमिक्रॉन का संक्रमण हो सकता है, लेकिन ओमिक्रॉन होने के बाद मरीजों को डेल्टा का इन्फेक्शन नहीं हो सकता. हालांकि, यह तभी मुमकिन है जब मरीज़ फुली वैक्सीनेटेड हो. WHO ने भी इस रिसर्च को सही माना है.WHO चीफ़ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने ट्वीट किया कि ओमिक्रॉन का संक्रमण डेल्टा के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ा सकता है, बशर्ते आप वैक्सीनेटेड हों. तो  इस रिसर्च का आधार क्या है और इसके रिजल्ट्स में और क्या निकल कर सामने आया है?

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एक महीने से लगातार रूस और यूक्रेन की सीमाओं पर युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है.  पश्चिमी देशों के यूक्रेन को समर्थन देने के बाद रूस किसी समझौते के मूड में नहीं था. इन दिनों स्थिति इस हद तक बिगड़ गई है कि कहा जा रहा है कि रूस किसी भी वक्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है. यूक्रेन के बॉर्डर पर लाखों रूसी सैनिको की मौजुदगी की खबर तो आई ही थी. अब नई खबर ये है कि रूस और यूक्रेन के इस टसल में अमेरिका भी कूद पड़ा है. इसी सिलसिले में अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन कल यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. यहां उनकी मुलाकात यूक्रेन के प्रेसिडेंट वोलोदिमिर जेलेंस्की से हई. इसके बाद आज ब्लिंकन बर्लिन पहुंचेंगे. यहां वो जर्मन नेताओं से बातचीत करेंगे और कल ब्लिंकन, जेनेवा में रूस के विदेश मंत्री लावरोव से मुलाकात कर के रूस-"यूक्रेन में तनाव कम करने को लेकर आख़िरी बातचीत करेंगे.

अमेरिका ही नहीं हाल ही में नाटो के साथ भी यूक्रेन को लेकर रूस की बैठक भी हुई थी मगर फिर भी यूक्रेन को लेकर बात नहीं बन पाई, और अब क्योंकि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रूस को यूक्रेन पर हमला करने से रोकने के लिए एक तरह से आखिरी डिप्लोमैटिक मिशन शुरू कर दिया है तो अब सवाल ये उठता है कि यूक्रेन को लेकर रूस से बात क्यों नहीं बन पा रही है? दोनों देशों के बीच बात कहां अटक रही है? वहीं ब्लिंकन के जेनेवा पहुंचने से पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन पास्की ने कहा कि हमारे हिसाब से रूस किसी भी वक्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है. दूसरी तरफ, रूस के एक सीनियर डिप्लोमैट ने ब्लिंकन-लावरोव की होने वाली बातचीत को लेकर पहले ही नाउम्मीदी का इजहार किया है. तो अगर कल को चल कर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो इसका इंटरनेशल पालिटीक्स पर क्या असर पड़ेगा और  भारत इसको लेकर क्या कोई रूख अपनाता दिखेगा?

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इंडिया-साउथ अफ्रीका की वनडे सीरीज चल रही है. कल पहला मुक़ाबला था, जिसमें टीम इंडिया 31 रनों से मात खा गई. टॉस साउथ अफ्रीका ने जीता था और पहले बैटिंग करते हुए 4 विकेट के नुकसान पर 296 रन बनाये. रासी वंडर डुसें ने नॉट आउट रहते हुए सबसे ज्यादा 129 रन बनाये. उन्हें मैन ऑफ़ द मैच घोषित किया गया. इसके अलावा कप्तान टेम्बा बवूमा ने भी शानदार 110 रनों की पारी खेली. टारगेट का पीछा करते हुए भारतीय टीम तय 50 ओवरों में 8 विकेट खोकर 265 रन ही बना सकी. शिखर धवन ने सबसे ज्यादा 79 रन बनाये, विराट कोहली और शार्दुल ठाकुर ने भी पचासा बनाया लेकिन ये नाकाफ़ी साबित हुआ. तो भारतीय टीम के हाथ से मैच कहां फ़िसला? ODI में पहली बार कप्तानी कर रहे केएल राहुल से क्या चूक हुई और इंडियन मिडिल ऑर्डर क्यों बार बार फेल हो रहा है?

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के इतिहास की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ

 

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