महाराष्ट्र सरकार द्वारा भाषा विवाद पर जीआर रद्द करने के निर्णय के बाद इस पर विवाद खड़ा हो गया है. राज्य के उद्योग मंत्री ने कहा कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए फरवरी 2022 में मराठी के साथ हिंदी और अंग्रेजी को अनिवार्य रूप से सिखाने का जीआर स्वीकार किया गया था. उन्होंने कहा कि जिन्होंने मराठी लोगों को टोपी पहनाई, वही लोग आज मराठी की टोपी पहनकर दिखावे की राजनीति कर रहे हैं.