महाराष्ट्र के पुणे से आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है. 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCW) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है. इस घटना ने एक बार फिर देश में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस वीभत्स घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह न सिर्फ एक जघन्य अपराध है बल्कि बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है. आयोग ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से भी मामले की निगरानी करने को कहा है.
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने अपने एक्स हैंडल पर कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई जरूरी है और दोषियों को जल्द सजा मिलनी चाहिए. साथ ही, पीड़ित परिवार को तुरंत सहायता और मुआवजा देने पर भी जोर दिया गया है.
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार यह घटना पुणे जिले की है. यहा रहने वाला एक 65 वर्षीय मजदूर ने कथित तौर पर बच्ची को खाने का लालच देकर अपने साथ ले गया. इसके बाद उसने एक पशुशाला में उसके साथ दुष्कर्म किया और हत्या कर दी. आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे 7 मई तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है.
CCTV से खुला राज, शव पशुशाला में मिला
जब बच्ची अचानक लापता हुई तो परिवार ने तलाश शुरू की. जांच के दौरान पास के एक घर के CCTV फुटेज में आरोपी बच्ची को ले जाते हुए दिखाई दिया. इसी आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया. बाद में बच्ची का शव पशुशाला में छिपा हुआ मिला. घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखा गया. सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस चौकी के बाहर प्रदर्शन किया और आरोपी को फांसी देने की मांग की.
प्रदर्शनकारियों ने मुंबई-बेंगलुरु हाईवे को जाम कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ. लोगों ने पोस्टमार्टम से पहले ही न्याय की मांग करते हुए पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई. पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाएगी और केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा. यह मामला पोस्को एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज किया गया है.
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की तैयारी
इस घटना पर कई राजनीतिक नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और आरोपी के लिए सबसे कठोर सजा की मांग की है. साथ ही, राज्य में सख्त कानून लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है. पुणे की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. एनसीडब्लू की सक्रियता से उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन असली चुनौती है ऐसे अपराधों को रोकना और बच्चियों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना.
ओमकार / अभिजीत करंडे