पुणे के नसरापुर में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद पत्थर से हत्या की घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने पुणे-बेंगलुरु हाईवे जाम कर दिया. पिछले करीब दो घंटों से हाईवे पूरी तरह से बाधित है, जिससे यातायात पर बड़ा असर पड़ा है.
आक्रोशित नागरिकों की मांग है कि आरोपी के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए. लोगों का कहना है कि इस मामले में सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए. स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को मौके पर बुलाने की भी मांग की है, ताकि वे खुद स्थिति का जायजा लें.
फिलहाल प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोगों का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ है.
पुलिस के अनुसार, घटना शुक्रवार दोपहर की है. बच्ची अपनी नानी के घर गांव में रह रही थी और मंदिर के पास खेल रही थी. आरोपी ने उसे बहलाकर पास के एक गाय के बाड़े में ले जाकर कथित तौर पर बलात्कार किया, फिर पत्थर से मारकर हत्या कर दी और शव को गोबर में फेंक दिया. जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिवार व स्थानीय लोगों ने तलाश शुरू की.
CCTV फुटेज में आरोपी को बच्ची को साथ ले जाते देखा गया. लोगों की तलाश में शव बाड़े में मिला और आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया. पुलिस ने तुरंत आरोपी को हिरासत में लिया. पोस्टमॉर्टम के लिए शव को अस्पताल भेजा गया.
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले भी दो छेड़छाड़ के मामलों में आरोपी रहा है. लेकिन अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया था. पुलिस उसे सीरियल ऑफेंडर मान रही है और जांच कर रही है कि क्या उसने अन्य लड़कियों के साथ भी ऐसा किया है.
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने बच्ची की मां की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 137(2), 103, 64, 74, 140(1), 140(3) तथा POCSO एक्ट की धाराएं 4, 3, 8, 12 के तहत FIR दर्ज की है. आरोपी को पुणे की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 7 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. पुलिस हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद करने और आरोपी के पिछले संपर्क की जांच कर रही है. चार्जशीट 15 दिनों में दाखिल की जाएगी और मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय महिला आयोग ने पुणे की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने कहा कि यह जघन्य अपराध पूरे समाज में गहरी पीड़ा और तीव्र आक्रोश उत्पन्न कर रहा है तथा बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर रहा है. आयोग ने इस घोर अमानवीय कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे जघन्य अपराध बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं और समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं.
अध्यक्षा ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने, जांच की निगरानी सुनिश्चित करने तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. साथ ही, पीड़ित परिवार को त्वरित सहायता एवं उचित मुआवजा देने, POCSO अधिनियम के तहत समयबद्ध चार्जशीट दाखिल करने तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है.
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