बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि तोते भी 'जंगली जानवर' की श्रेणी में आते हैं और यदि वे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो सरकार को मुआवजा देना होगा. अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को एक किसान को उसके अनार के पेड़ों के नुकसान के लिए भुगतान करने का आदेश दिया है.
यह मामला वर्धा जिले के हिंगी गांव के 70 वर्षीय किसान महादेव डेकाटे से जुड़ा है. उन्होंने अदालत में बताया कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभयारण्य से आए जंगली तोतों ने उनके अनार के बगीचे को भारी नुकसान पहुंचाया. उन्होंने इसके लिए मुआवजे की मांग की थी.
40,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश
किसान के अनुसार, उनके लगभग 200 अनार के पेड़ प्रभावित हुए. अदालत ने सरकार को प्रति पेड़ 200 रुपये के हिसाब से कुल 40,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
क्या थी सरकार की दलील?
सरकार ने अदालत में कहा था कि पुराने सरकारी आदेशों के अनुसार केवल हाथी और बाइसन जैसे जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने पर ही मुआवजा दिया जा सकता है. लेकिन अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कुछ ही जानवरों के कारण हुए नुकसान पर मुआवजा दिया जाए और बाकी को नजरअंदाज किया जाए, तो यह बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ होगा. अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया.
अदालत ने यह भी कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत तोते और उनसे जुड़ी कई प्रजातियां संरक्षित हैं. इसलिए वे राज्य की संपत्ति माने जाते हैं. जब कानून नागरिकों से उम्मीद करता है कि वे वन्यजीवों की रक्षा करें, तो यह भी जरूरी है कि सरकार उनके कारण हुए नुकसान की भरपाई करे.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा, तो वे अपनी फसलों की रक्षा के लिए ऐसे कदम उठा सकते हैं, जिससे वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे कानून का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा.
महादेव डेकाटे ने दावा किया था कि उन्हें करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ. वन विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी निरीक्षण में माना था कि लगभग 50 प्रतिशत फल पक्षियों द्वारा खराब किए गए थे. यह फैसला किसानों और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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