पुणे के मुंधवा जमीन घोटाले में पार्थ पवार को राहत मिलने वाली है. राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खड़गे के नेतृत्व वाली एक उच्च स्तरीय समिति पार्थ पवार को पुणे के मुंधवा जमीन घोटाले में संलिप्तता के आरोपों से मुक्त करने की तैयारी कर रही है. जांच में पाया गया है कि लेन-देन के सभी दस्तावेजों से पार्थ पवार का नाम और हस्ताक्षर गायब हैं, जैसा कि पहले पुलिस चार्जशीट में भी देखा गया था.
पुणे में 40 एकड़ 'महार वतन' भूमि की अवैध खरीद की यह जांच अब आखिरी चरण में पहुंच गई है. कमेटी की समय-सीमा 6 फरवरी को खत्म हो रही है, लेकिन नगर निगम चुनावों में अधिकारियों की व्यस्तता की वजह से आखिरी समीक्षा बैठक के लिए एक हफ्ते का विस्तार मिलने की उम्मीद है.
इस रिपोर्ट के औपचारिक रूप से सरकार को सौंपे जाने के बाद ही पार्थ पवार को आधिकारिक तौर पर क्लीन चिट मिल पाएगी.
1800 करोड़ की जमीन और 300 करोड़ का खेल
जांच में मुंडवा जमीन के मूल्यांकन को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, जिस जमीन की असली कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये थी, उसे कथित तौर पर सिर्फ 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया था. हालांकि, पार्थ पवार 'अमीडिया कंपनी' में पार्टनर हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट में निदेशक दिग्विजय पाटिल, विक्रेता शीतल तेजवानी और रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.
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स्टाम्प ड्यूटी की वसूली और अधूरी डील
कमेटी ने घोटाले का खुलासा होने के बाद 'अमीडिया कंपनी' से 21 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी वसूली की सिफारिश की है. गौर करने वाली बात यह है कि घोटाले की खबर सामने आते ही कंपनी ने इस सौदे को रद्द करने की कोशिश की थी. फिलहाल, विकास खड़गे कमेटी की आखिरी मीटिंग के बाद ही इस रिपोर्ट को राज्य सरकार को आधिकारिक तौर पर सौंपा जाएगा, जिसके बाद ही आखिरी फैसला होगा.
ऋत्विक भालेकर