मुंडवा लैंड डील केस में पार्थ पवार को मिली क्लीन चिट? विपक्ष के दावों पर आई महाराष्ट्र सरकार की सफाई

मुंडवा में 40 एकड़ महार वतन जमीन घोटाले की जांच जारी है. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कंपनी निदेशकों और रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं, जबकि पार्थ पवार का नाम सीधे तौर पर शामिल है या नहीं, यह अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा.

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विपक्ष ने अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम लैंड डील स्कैम में आने पर इसे मुद्दा बनाया है (File Photo- Facebook @Parth Ajit Pawar) विपक्ष ने अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम लैंड डील स्कैम में आने पर इसे मुद्दा बनाया है (File Photo- Facebook @Parth Ajit Pawar)

ऋत्विक भालेकर

  • मुंबई,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:43 PM IST

महाराष्ट्र में मुंडवा लैंड डील केस को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. पार्थ पवार को कथित तौर पर क्लीन चिट मिलने की खबरों के बीच राज्य सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच कर रही उच्च स्तरीय समिति ने अभी तक कोई रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है. उन्होंने समिति को जांच पूरी करने के लिए आठ दिन का अतिरिक्त समय दिया है. 

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मंत्री ने बताया कि स्थानीय चुनावों के कारण अधिकारियों पर काम का दबाव है, इसलिए समय बढ़ाया गया है. इससे पहले तक बताया जा रहा था कि राजस्व सचिव विकास खड़गे की अगुवाई वाली समिति को पार्थ पवार के हस्ताक्षर लेन-देन के दस्तावेजों में नहीं मिले. हालांकि सरकार ने कहा है कि इस तरह की खबरें भ्रामक हैं और जांच अभी जारी है.

बता दें कि इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में कानून का इस्तेमाल चुनिंदा तरीके से किया जा रहा है. राउत ने दावा किया कि करीब 1800 करोड़ रुपये की जमीन को कथित तौर पर सिर्फ 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जिसे उन्होंने बेनामी सौदा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने सहयोगियों को बचाने का प्रयास कर रही है.

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सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने भी कथित क्लीन चिट पर सवाल उठाते हुए कहा कि केस से जुड़े दस्तावेजों में पार्थ पवार का नाम और हस्ताक्षर मौजूद हैं. उन्होंने यह भी कहा कि खारगे समिति के पास कानूनी रूप से क्लीन चिट देने का अधिकार नहीं है.

गौरतलब है कि फिलहाल 40 एकड़ महार वतन जमीन घोटाले की जांच जारी है. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कंपनी निदेशकों और रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं, जबकि पार्थ पवार का नाम सीधे तौर पर शामिल है या नहीं, यह अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा. इस मामले के राजनीतिक मायने भी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि पार्थ पवार को राज्यसभा सीट का संभावित दावेदार माना जा रहा है.

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