मुंबई मेयर की रेस में छुपा रुस्तम कौन साबित होगा? विपक्ष के पास भी सिर्फ 8 वोट कम

देश की सबसे समृद्ध मुंबई नगर निगम यानि बीएमसी के मेयर पद को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है. बीएमसी में बीजेपी सबसे ज्यादा सीटें जरूर जीतने में कामयाब रही है, लेकिन अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी. वहीं, विपक्ष भी नंबर गेम में बहुत पीछे नहीं है, सिर्फ सीटे कम है.

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बीएमसी के मेयर को लेकर शह-मात का खेल जारी (Photo-ITG) बीएमसी के मेयर को लेकर शह-मात का खेल जारी (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनावों में बीजेपी की मिली भारी जीत के बाद मुंबई में बीएमसी के मेयर पद को लेकर सियासत तेज हो गई. बीएमसी चुनावों में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है. बीजेपी की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं, जिसका समर्थन हासिल कर बीजेपी अपना मेयर बना सकती है. 

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मुंबई के 227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 सीटें मिली हैं.  महायुति को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद मेयर के पद पर सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा. ऐसे में सियासी दल अपने-अपने पार्षदों को बचाए रखने की कवायद में जुट गए हैं.

शिंदे ने अपने पार्षदों को मुंबई के ताज होटल में ठहरा रखा है तो उद्धव ठाकरे भी अपने नगर सेवक को अपने पाले में जोड़े रखने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. बीएमसी में बीजेपी-शिंदे के पास मेयर बनाने का नंबर गेम जरूर है, लेकिन विपक्ष भी कमजोर नहीं है. उद्धव की शिवसेना यूबीटी के 65 और कांग्रेस के 24 पार्षद जीते हैं. ऐसे में उद्धव के करीबी और शिवेसना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र में सियासी खेला होने का इशारा कर रहे हैं? 

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मुंबई में मेयर को लेकर शह-मात का खेल
बीएमसी चुनाव के नतीजे ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अपने दम पर अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है. मुंबई चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए शिंदे की बैसाखी की जरूरत होगी. शिंदे ने मुंबई नगर निगम चुनाव में जीते अपने सभी 29 पार्षदों को होटल में ठहरा रखा.

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हालांकि, शिवसेना की तरफ से कहा जा रहा है कि उन्होंने मुंबई के अपने 29 सदस्यों को मुंबई के एक होटल में एक ओरिएंटेशन वर्कशॉप के लिए शिफ्ट किया है, ताकि उन्हें बीएमसी  के कामकाज के बारे में जागरूक किया जा सके. शिंदे ने यह कदम बीएमसी चुनावों के नतीजों की घोषणा के फौरन बाद उठाया है. इस तरह से अपने नगर सेवकों को जोड़े रखने का दांव चल रहे हैं.

उद्धव खेमा एक्टिव तो बीजेपी भी सक्रिय
मुंबई के मेयर पद लेकर उद्धव ठाकरे खेमा एक्टिव हो गया है. संजय राउत ने दावा किया है कि शिवसेना खेमे के कई पार्षद और एकनाथ शिंदे खुद भी नहीं चाहते हैं कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने? राउत ने कहा कि अगर पार्षदों को होटल में बंद कर दिया जाता है, तो संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए कई दूसरे सोर्स भी हैं. 

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वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी इशारों में बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर भगवान चाहेंगे तो शिवसेना (यूबीटी) का मेयर होगा. उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हए कहा था कि जो पार्षद एक बार पाला बदल चुके हैं, वे फिर से ऐसा कर सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे गुट से चुने गए कई लोग मूल रूप से शिवसेना (यूबीटी) के पार्षद थे और बीजेपी मेयर पद हथियाने के लिए दलबदल करवा सकती है.

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ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) का मेयर चुनना उनका सपना है और भगवान की इच्छा से यह संभव होगा. ऐसे मेयर चुनाव शिवसेना यूबीटी भी खेला कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे की पार्टी अपने सहयोगी, बीजेपी द्वारा सेंधमारी के प्रयासों से डरी हुई है, जिसके चलते नगर सेवकों को होटल में रोक रखा है. 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मजकिया लहजे में कहा कि क्या 'देवा' से उनके पूर्व सहयोगी का मतलब उनसे था या ऊपर वाले भगवान से. सीएम फडणवीस ने कहा कि मुझे भी 'देवा' कहा जाता है, इसलिए मैं पूछ रहा हूं, और कहा कि ऊपर वाले भगवान ने तय किया है कि महायुति का मेयर होगा. इतना ही नहीं बीजेपी के तमाम नेता मुंबई मेयर के लिए दावे कर चुके हैं. 

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मेयर के लिए नंबर गेम में विपक्ष 8 पार्षद कम

बीजेपी और शिंदे गुट वाले शिवसेना के पार्षदों को मिलकर 118 होता है. बीएमसी के 227 सीटों में से बहुमत के लिए 114 चाहिए. इस तरह बीजेपी-शिंदे के पास चार पार्षद ज्यादा हो रहे हैं, लेकिन जिस तरह से सियासी दांव चले जा रहे हैं, उसके चलते गेम कुछ भी सकता है. विपक्ष भी मेयर पद के नंबर गेम में बहुत पीछे नहीं है. 

विपक्षी खेमे में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी एमएलएस के छह नगर सेवक जीते हैं. कांग्रेस, जिसने वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन में अलग से चुनाव लड़ा था, को 24 सीटें मिलीं. इसके अलावा AIMIM को 8, अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को 3, सपा को 2, और शरद पवार की एनसीपी को एक सीट मिली. 

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विपक्ष दलों के पार्षद एकजुट होते हैं, तो उसका कुल आंकड़ा 106 होता, जो बीएमसी के मेयर की कुर्सी तक पहुंचने की मंजिल में सिर्फ आठ सीटें कम है. ऐसे में शायद यही वजह है कि शिंदे के अपने शिवसेनिक पार्षदों को बचाने की कवायद में है. 

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बीजेपी और एकनाथ शिंदे में शह-मात का खेल
 महाराष्ट्र में मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत पहले आरक्षण तय किया जाता है, फिर विशेष बैठक में सभी पार्षद मतदान करते हैं. साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार मेयर और उपमेयर घोषित किया जाता है. हालांकि, किसी दल के पास अगर स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो गठबंधन और चुनाव के बाद की राजनीतिक बातचीत निर्णायक भूमिका निभाती है.

मुंबई में इस बार मेयर चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार 227 निर्वाचित पार्षदों के साथ 10 नामांकित पार्षद भी होंगे. मार्च 2023 में मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर नामांकित पार्षदों की संख्या पांच से बढ़ाकर दस कर दी गई थी.

माना जा रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को नामांकित पार्षदों में बड़ा हिस्सा मिल सकता है, जिससे मेयर चुनाव के नतीजों पर असर पड़ सकता है.  ऐसे में देखना होगा कि मेयर पद के शह-मात के खेल में कौन किस पर भारी पड़ता है? 

दिलचस्प बात यह है कि नगर निगम के पार्षद के सियासी पाला बदलने पर दलबदल कानून बाधा नहीं बनता. ऐसे में मेयर पद के लिए बड़ा खेला हो सकता है. इसीलिए शिंदे अपने सिपहसलारों को बचाए रखने की कवायद में है तो उद्धव ठाकरे और कांग्रेस को डर सता रहा है. 

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