मराठा आरक्षण: महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने पीएम और राष्ट्रपति को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की मांग

मराठा आरक्षण को लेकर बुधवार (5 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. सर्वोच्च अदालत ने शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया.

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मराठा आरक्षण की मांग (फाइल फोटो) मराठा आरक्षण की मांग (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 08 मई 2021,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की उप-समिति ने शनिवार को अपनी बैठक में पीएम और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनके हस्तक्षेप की मांग की है. वहीं यह भी तय किया कि मराठा आरक्षण पर SC निर्णय का विश्लेषण करने और 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी. इसी बीच महाराष्ट्र के मंत्री अशोक चव्हाण ने जानकारी दी कि मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर विचार किया जा रहा है.

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जानकारी के मुताबिक मुंबई में मराठा आरक्षण पर कैबिनेट उप-समिति की बैठक चल रही है. इस बैठक में मंत्री अशोक चव्हाण, एकनाथ शिंदे, दिलीप वालसे पाटिल, मुख्य सचिव सीताराम कुंटे, महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी और अन्य उपस्थित हैं.

बता दें कि मराठा आरक्षण को लेकर बुधवार (5 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. सर्वोच्च अदालत ने शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया. अदालत के फैसले के अनुसार, अब किसी भी नए व्यक्ति को मराठा आरक्षण के आधार पर कोई नौकरी या कॉलेज में सीट नहीं दी जा सकेगी.

क्लिक करें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण असंवैधानिक करार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मराठा समुदाय को कोटा के लिए सामाजिक, शैक्षणिक रूप से पिछड़ा घोषित नहीं किया जा सकता है, यह 2018 महाराष्ट्र राज्य कानून समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. कोर्ट ने कहा कि हम 1992 के फैसले की फिर से समीक्षा नहीं करेंगे, जिसमें आरक्षण का कोटा 50 फीसदी पर रोक दिया गया था.

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महाराष्ट्र में करीब 75 फीसदी आरक्षण

विभिन्न समुदायों व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिए गए आरक्षण को मिलाकर महाराष्ट्र में करीब 75 फीसदी आरक्षण हो गया है. 2001 के राज्य आरक्षण अधिनियम के बाद, महाराष्ट्र में कुल आरक्षण 52% था. 12-13% मराठा कोटा के साथ राज्य में कुल आरक्षण 64-65% हो गया था. केंद्र द्वारा 2019 में घोषित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10% कोटा भी राज्य में प्रभावी है.

 

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