मुंबई के एक व्यक्ति की ऑनलाइन ठगी में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा रकम जाने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने उसकी शिकायत खारिज कर दी. आयोग ने कहा कि जब ग्राहक खुद ठगों को वन-टाइम पासवर्ड (OTP) शेयर करता है तो ऐसी स्थिति में बैंक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
आयोग ने माना- ग्राहक ठगी का शिकार हुआ
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (सबअर्बन) के अध्यक्ष प्रदीप कडू और सदस्य गौरी एम कापसे की पीठ ने पिछले महीने दिए आदेश में माना कि शिकायतकर्ता ठगी का शिकार हुआ. लेकिन आयोग ने कहा, “RBI के नियम साफ कहते हैं कि अगर नुकसान ग्राहक की लापरवाही से हुआ है, तो पूरा नुकसान ग्राहक को ही उठाना होगा.”
नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन रिन्यू करते समय हुआ फ्रॉड
शिकायतकर्ता के अनुसार, जनवरी 2022 में वह अपना नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन रिन्यू करने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान उसे ईमेल में एक लिंक मिला, जिस पर उसने क्लिक किया. उसे पता नहीं था कि यह ईमेल नेटफ्लिक्स की ओर से नहीं था. उसने लिंक पर जाकर अपने कार्ड की जानकारी और HDFC बैंक से आया OTP भी भर दिया.
कुछ सेकंड में खाते से कटे 1.25 लाख रुपये
OTP भरने के कुछ ही सेकंड बाद बैंक से SMS आया कि उसके खाते से 1,25,665 रुपये का ट्रांजैक्शन हो गया है. जबकि सब्सक्रिप्शन की असली रकम सिर्फ 799 रुपये थी. इसके बाद उसे समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गया है. उसने तुरंत बैंक और पुलिस की साइबर सेल से संपर्क किया.
बैंक ने शिकायत बंद की
बैंक ने शिकायत बंद करते हुए कहा कि ट्रांजैक्शन सुरक्षित मोड से OTP वैलिडेशन के बाद हुआ है और OTP गोपनीय होता है, जो केवल कार्ड होल्डर को ही पता होता है.
कंज्यूमर आयोग में पहुंचा मामला
HDFC बैंक के जवाब से संतुष्ट न होकर शिकायतकर्ता उपभोक्ता आयोग पहुंचा. उसने दलील दी कि खाते से अवैध निकासी बैंक की लापरवाही और सेवा में कमी के कारण हुई है. बैंक ने आयोग में कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद फर्जी लिंक पर क्लिक किया और अपने क्रेडेंशियल्स डाले, जिसके बाद OTP जनरेट हुआ. सभी डिटेल सही मिलने पर ट्रांजैक्शन को रोकने का बैंक के पास कोई कारण नहीं था.
RBI गाइडलाइन का हवाला
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ठगी हुई है, लेकिन शिकायतकर्ता ने खुद गोपनीय जानकारी यानी OTP ठगों के साथ साझा किया. RBI की गाइडलाइन साफ कहती है कि अगर नुकसान ग्राहक की लापरवाही से होता है तो पूरा नुकसान ग्राहक को ही उठाना होगा. इसी आधार पर आयोग ने कहा कि बैंक की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं पाई गई, इसलिए शिकायत खारिज की जाती है.
aajtak.in