मुंबई की विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामले में महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता (अजित गुट) छगन भुजबल को आरोपों से मुक्त कर दिया है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के मामले में पहले ही राहत मिलने के बाद भी ईडी का केस उनके खिलाफ चल रहा था. भुजबल ने इस मामले में डिस्चार्ज की अर्जी दाखिल की थी, जिसका ईडी ने विरोध किया था, लेकिन अदालत ने आज यह अर्जी मंजूर कर ली.
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि छगन भुजबल कथित रिश्वत देने वाले और रिश्वत लेने वाले दोनों ही एसीबी मामले में पहले ही बरी हो चुके हैं, इसलिए पीएमएलए (PMLA) के तहत दर्ज मामले में भी आरोपों को डिस्चार्ज किया जाता है. इस फैसले के तहत करीब 25 लोगों को मामले से राहत मिली है. इनमें छगन भुजबल, समीर भुजबल, पंकज भुजबल और उनके सभी कारोबारी सहयोगी शामिल हैं, जिन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया था. हालांकि, कुछ आरोपियों को अब भी इस मामले में राहत नहीं मिली है.
भुजबल के खिलाफ क्या था ED और ACB का केस?
छगन भुजबल के खिलाफ एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के मामले मुख्य रूप से महाराष्ट्र सदन घोटाले से जुड़े थे. महाराष्ट्र के एंटी करप्शन ब्यूरो ने 2016 में आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सदन (नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सरकार का भवन) के नवीनीकरण/निर्माण कार्य में ठेके दिलाने के बदले करीब 5 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई. आरोप था कि यह रिश्वत ठेकेदारों से ली गई और इसमें छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज भुजबल, भतीजे समीर भुजबल और कुछ कारोबारी शामिल थे. बाद में एसीबी केस में कथित रिश्वत देने वाले और लेने वाले सभी आरोपी सबूतों के अभाव में डिस्चार्ज हो गए.
ईडी ने एसीबी केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का मामला दर्ज किया. आरोप था कि रिश्वत की रकम को अलग-अलग कंपनियों और लेन-देन के जरिए ब्लैक से व्हाइट मनी में कंवर्ट किया गया. जब एसीबी केस में आधारभूत अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) खत्म हो गया, तो अदालत ने माना कि उसके परिणामस्वरूप PMLA केस भी टिकाऊ नहीं है, और इसलिए भुजबल समेत करीब 25 आरोपियों को ईडी केस से भी डिस्चार्ज कर दिया गया.
विद्या