महाराष्ट्र के पूर्व DGP संजय पांडे कौन हैं... फडणवीस और शिंदे को फंसाने के आरोप, विवादों से पुराना नाता

महाराष्ट्र कैडर के 1986 बैच के पूर्व पुलिस महानिदेशक संजय पांडे पर आरोप है कि उन्होंने अर्बन लैंड सीलिंग घोटाले की दोबारा जांच का गलत इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की. यह आरोप निवर्तमान डीजीपी रश्मि शुक्ला की विशेष जांच रिपोर्ट में सामने आए हैं.

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संजय पांडे पर पहले भी फोन टैपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोप लगे थे. (File Photo: ITG) संजय पांडे पर पहले भी फोन टैपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोप लगे थे. (File Photo: ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:40 PM IST

महाराष्ट्र कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी और पूर्व पुलिस महानिदेशक संजय पांडे एक बार फिर चर्चा में हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने अर्बन लैंड सीलिंग यानी यूएलसी घोटाले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची. ये आरोप राज्य की निवर्तमान डीजीपी रश्मि शुक्ला की ओर से गृह विभाग को सौंपी गई विशेष जांच रिपोर्ट में लगाए गए हैं.

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आईआईटी कानपुर से पढ़े संजय पांडे ने अपने करियर में कई अहम पद संभाले. महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में अप्रैल 2021 में उन्हें महाराष्ट्र का कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था, लेकिन इस नियुक्ति को यूपीएससी की मंजूरी नहीं मिली. इसके बाद फरवरी 2022 में उन्हें पद से हटा दिया गया और जून 2022 में वे सेवानिवृत्त हो गए. रिटायरमेंट के बाद 2024 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी जॉइन की.

फोन टैपिंग केस में फंसे

सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद संजय पांडे की मुश्किलें बढ़ गईं. साल 2022 में सीबीआई ने उन्हें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के फोन टैपिंग मामले में आरोपी बनाया. आरोप है कि उन्होंने अपनी निजी कंपनी के जरिए एनएसई कर्मचारियों के फोन अवैध रूप से टैप कराए. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया. इस मामले में वह करीब पांच महीने तक जेल में रहे और बाद में उन्हें जमानत मिली.

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यूएलसी घोटाला क्या है?

यूएलसी घोटाला साल 2016 में सामने आया था, जिसकी शुरुआती जांच ठाणे पुलिस ने की थी. इस घोटाले में शहरी उपयोग के लिए आरक्षित जमीन बिल्डरों ने बेहद कम कीमत पर धोखाधड़ी से हासिल कर ली, जिससे राज्य सरकार को 160 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. इस मामले में बिल्डर श्यामसुंदर अग्रवाल समेत कई बिल्डरों, सरकारी अधिकारियों और टाउन प्लानिंग विभाग के लोगों के नाम सामने आए. बाद में ठाणे के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई.

रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय पांडे ने इस केस की दोबारा जांच का गलत इस्तेमाल किया और जांच से जुड़े अधिकारियों और आरोपियों पर दबाव डालकर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे का नाम लेने की कोशिश की, जबकि शुरुआती जांच में दोनों को आरोपी नहीं बनाया गया था.

रश्मि शुक्ला कौन हैं?

रश्मि शुक्ला 1988 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और महाराष्ट्र की पहली महिला डीजीपी रही हैं. उनका कार्यकाल जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक रहा. इससे पहले वह राज्य खुफिया विभाग की प्रमुख, पुणे की पुलिस कमिश्नर और मार्च 2023 से जनवरी 2024 तक सशस्त्र सीमा बल की महानिदेशक भी रह चुकी हैं. उनकी रिपोर्ट के बाद संजय पांडे एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं.

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