महाराष्ट्र कैडर के ईमानदार और कड़क छवि वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा में हैं. राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़े प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उनका तबादला कर दिया है. महज 21 साल की सर्विस में ये उनका 24वां ट्रांसफर है, जिसके कारण उन्हें महाराष्ट्र का 'अशोक खेमका' कहा जाने लगा है.
आधिकारिक आदेश के अनुसार, मुंबई मंत्रालय में दिव्यांग कल्याण विभाग के वर्तमान सचिव मुंढे का तबादला राज्य सचिवालय में राजस्व और वन विभाग के आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और पुनर्स्थापन सचिव के रूप में कर दिया गया है. अगस्त 2025 में दिव्यांग कल्याण विभाग में उनकी नियुक्ति की गई थी, जिसे अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था.
इस प्रशासनिक फेरबदल में अश्विनी भिड़े का नाम भी प्रमुखता से उभरा है. उन्हें देश के सबसे अमीर नागरिक निकाय, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का कमिश्नर नियुक्त किया गया है. 154 साल पुराने बीएमसी के इतिहास में इस पद पर बैठने वाली वह पहली महिला अधिकारी बन गई हैं. इससे पहले वह मुख्यमंत्री की अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में सेवाएं दे रही थीं.
मंत्रालय में कृषि एवं पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत विकास चंद्र रस्तोगी को वित्त विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्तीय सुधार) के पद पर तैनात किया गया है.
महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्रा को मुख्यमंत्री का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया है, जबकि विकास चंद्र रस्तोगी को वित्त विभाग में वित्तीय सुधारों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
इसके अलावा विनीता वैद सिंगल को मृदा एवं जल संरक्षण विभाग और परिमल सिंह को कृषि सचिव बनाया गया है. पुणे के अतिरिक्त नगर आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी. को अब वसई-विरार नगर निगम का नया नागरिक प्रमुख नियुक्त किया गया है.
सरकार का कहना है कि ये फेरबदल प्रशासनिक दक्षता और रिक्त पदों को भरने के उद्देश्य से जारी आधिकारिक आदेश के तहत किया गया है, लेकिन मुंढे जैसी छवि वाले अधिकारी की इतनी बार बदली होना कई सवाल खड़े कर रहा है.
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