महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में उपजिलाधिकारी (डिप्टी कलेक्टर) बनाने का झांसा देकर धोखाधड़ी करने वाले पुणे के एक गिरोह के काले कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं. इस गिरोह ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उस शहीद के बेटे को अपना शिकार बनाया, जिसने जंगलों में नक्सलियों की गोलियां अपने सीने पर झेलकर देश के लिए बलिदान दिया था.
हाथ से गई जमापूंजी, जमीन और घर
इस धोखे के कारण न केवल अधिकारी बनने का सपना टूटा, बल्कि जमापूंजी, जमीन और घर भी हाथ से निकल गया. सदमे में उसकी शहीद की पत्नी और उसकी मां ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. यह दर्दनाक दास्ता गढ़चिरौली के दुर्गानगर निवासी 27 साल के सागर गणपत मडावी की है.
पुलिस के अनुसार, सागर के पिता गणपत मडावी साल 2013 में एटापल्ली के तोडगट्टा में नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे. सागर अपने पिता की तरह ही बड़ा अधिकारी बनकर समाज सेवा करना चाहता था. पुणे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उसकी मुलाकात ज्ञानेश्वर वरे से हुई. वरे ने दावा किया कि 'मंत्रालय' में उसकी ऊंची पहुंच है और वह सागर को सीधे उपजिलाधिकारी बनवा सकता है.
सीधे डिप्टी कलेक्टर बनाने का दावा
आरोपियों ने न केवल सागर, बल्कि उसके भाई-बहन को भी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया. ठगों की मांग पूरी करने के लिए सागर ने पिता के बलिदान के बाद मिली पूरी सरकारी आर्थिक सहायता दांव पर लगा दी . इसके अलावा घर के जेवर, गढ़चिरौली और एटापल्ली के कीमती प्लॉट्स भी बेच दिए. यहां तक कि उसने अपना पुश्तैनी घर भी बेच दिया और अंत में अपनी बीमा पॉलिसी (LIC) तुड़वा दी.
बर्बादी के गम में मां ने दी जान
2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम वसूले जाने के बाद भी जब सागर को नौकरी नहीं मिली, तब उसे ठगी का एहसास हुआ. उसने पुलिस निरीक्षक विनोद चव्हाण के पास अपनी पूरी कहानी सुनाई, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया. शहीद की पत्नी मीनाबाई मडावी को उम्मीद थी कि उनके बच्चे अधिकारी बनेंगे. लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और सिर पर छत भी नहीं बची, तो उनका धैर्य जवाब दे गया. इसी मानसिक तनाव और विवशता में उन्होंने 4 जनवरी 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.
गढ़चिरौली पुलिस ने मुख्य आरोपी ज्ञानेश्वर शिवाजी वरे को गिरफ्तार कर लिया है. 21 अप्रैल को अदालत ने उसे चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. इस गिरोह में 'महाजन' नाम का एक व्यक्ति खुद को मंत्रालय का बड़ा अधिकारी बताता था. वरे के साथ अजय भगत, मुकेश यादव और संदीप कुमार भी इस साजिश में शामिल थे. ये चारों फिलहाल फरार हैं. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने युवाओं को इस तरह बर्बाद किया है.
व्येंकटेश दुडमवार