प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 85 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र लोढ़ा को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है. यह मामला पिछले साल सितंबर में तब उभरा था जब कंपनी के अधिकारियों ने राजेंद्र लोढ़ा और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था.
एफआईआर में फ्रॉड, आपराधिक विश्वासघात, और साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल थे. मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने मामले की जांच संभाली. जांच के दौरान राजेंद्र लोढ़ा समेत कई आरोपियों को हिरासत में लिया गया.
जांच एजेंसियों के अनुसार, राजेंद्र लोढ़ा पर कंपनी से जमीन अधिग्रहण के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप है. पुलिस ने इस संबंध में करीब 40 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें से सात गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज हो चुके हैं. एक गवाह, जो राजेंद्र का ड्राइवर बताया गया है, ने कहा कि उसने कैश एक अन्य आरोपी को सुपुर्द की थी और फोर्ट और बोरीवली क्षेत्रों से एक करोड़ रुपये जुटाकर राजेंद्र को सौंपे थे.
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कंपनी की एक लाभकारी जमीन को कथित तौर पर कम मूल्य पर राजेंद्र के बेटे की कंपनी को ट्रांसफर किया गया था. पुलिस ने राजेंद्र के कंप्यूटर और मोबाइल फोन से नकद लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं.
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सीसीटीवी फुटेज में राजेंद्र के भाई दीपक लोढ़ा को संदिग्ध बैग घर से बाहर ले जाते देखा गया, जिसमें बैग से संबंधित सामग्री में नकद लेनदेन और कंपनी दस्तावेज मिले.
ईडी ने कोर्ट की अनुमति से, जब राजेंद्र न्यायिक हिरासत में थे, उन्हें अपने कब्जे में लिया है और अब उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग की जाएगी. मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर टिकी है.
दीपेश त्रिपाठी