बॉम्बे HC से BJP विधायक तमिल सेल्वन को बड़ी राहत, चुनाव में जीत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भाजपा विधायक कैप्टन आर. तमिल सेल्वन के खिलाफ दायर उस चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें मुंबई के 179 सायन-कोलीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत को रद्द करने की मांग की गई थी. न्यायमूर्ति जाधव ने कहा कि याचिकाकर्ता लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करने में विफल रहे और बिना विवरण के केवल आरोप किसी चुनाव को अमान्य नहीं जा सकता.

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बॉम्बे हाईकोर्ट. (Photo:ITG) बॉम्बे हाईकोर्ट. (Photo:ITG)

विद्या

  • मुंबई,
  • 21 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 1:25 AM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक कैप्टन आर. तमिल सेल्वन के खिलाफ दायर एक चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें मुंबई के 179 सायन-कोलीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत को रद्द करने की मांग की गई थी.

न्यायमूर्ति मिलिंद एन. जाधव ने फैसला सुनाया कि कांग्रेस उम्मीदवार गणेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका अस्पष्ट थी और इसमें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत जरूरी फैक्ट्स का अभाव था. यादव ने 65,534 वोट हासिल किए थे (दूसरा सबसे अधिक वोट), जबकि सेल्वन को 73,429 वोटों के साथ विजयी उम्मीदवार घोषित किया गया था.

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देनदारी छिपाने का लगाया आरोप

कांग्रेस प्रत्याशी ने अपनी याचिका में अधिनियम की धारा 100(1)(डी)(iv) के तहत सेल्वन के चुनाव को चुनौती दी थी और आरोप लगाया था कि उनके नामांकन हलफनामे में संपत्ति और देनदारियों को छिपाया गया है.

उन्होंने याचिका में दावा किया गया था कि सेल्वन ने 90 लाख रुपये के होम लोन, सेंट्रल रेलवे के पक्ष में 2.72 करोड़ रुपये से ज्यादा के मध्यस्थता निर्णय और CRIF व CIBIL रिपोर्ट में दिखाई गई अन्य देनदारियों का खुलासा नहीं किया.

बेटी के नाम था फ्लैट

कोर्ट में सेल्वन का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. वीरेंद्र तुलजापुरकर ने तर्क दिया कि ये आरोप निराधार और दस्तावेजी साक्ष्यों से असमर्थित हैं. उन्होंने कहा कि फ्लैट केवल सेल्वन की बेटी के नाम पर खरीदा गया था और लोन का भुगतान भी वह कर रही थी, इसलिए इसका खुलासा करना आवश्यक नहीं था.

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मध्यस्थता पुरस्कार के बारे में तुलजापुरकर ने बताया कि हाईकोर्ट ने इसके निष्पादन पर रोक लगा दी थी, जिसका मतलब है कि कोई देनदारी प्रकट करने की आवश्यकता नहीं थी. उन्होंने आगे दावा किया कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर महत्वपूर्ण दस्तावेज छिपाए और देर से अपने मामले को सुधारने की कोशिश की.

वहीं, दूसरी ओर यादव के वकील प्रेमलाल कृष्णन ने जोर देकर कहा कि सेलवन की चूक जानबूझकर की गई थी और इससे चुनाव परिणाम पर असर पड़ा, जिससे मतदाताओं को उनकी वित्तीय स्थिति के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाई.

हालांकि, न्यायमूर्ति जाधव ने माना कि यादव की याचिका अस्पष्ट और सामान्य थी और ये धारा 83 की अनिवार्य आवश्यकता को पूरा नहीं करती, जिसमें फैक्ट्स का संक्षिप्त विवरण होना चाहिए. न्यायमूर्ति ने कहा, 'यादव ने बिना कोई विवरण दिए, सेलवन द्वारा केवल सामान्य और अस्पष्ट उल्लंघनों का आरोप लगाया है.'

'बिना विवरण के अमान्य नहीं हो सकता चुनाव'

न्यायमूर्ति जाधव ने माना कि यादव लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करने में विफल रहे और बिना विवरण के केवल आरोप किसी चुनाव को अमान्य नहीं जा सकता. इसके बाद याचिका को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश VII नियम 11 के तहत खारिज कर दिया.

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