महाराष्ट्र निकाय चुनाव में बीजेपी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया. बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में ठाकरे ब्रदर्स को हराया तो पुणे नगर निकाय में शरद पवार और अजीत पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुटों के गठबंधन को भी परास्त कर दिया.
मुंबई के सभी 227 वार्डों के चुनाव परिणाम आधी रात के आसपास घोषित किए गए. बीजेपी ने 89 सीटें जीतीं और उसकी सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें अपने नाम कीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) को 65 और एमएनएस को छह सीटें मिलीं. वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें, AIMIM को 8, एनसीपी को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और एनसीपी (एसपी) को सिर्फ एक सीट मिली.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने शाम को दक्षिण मुंबई में उत्साहित पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन 29 नगर निगमों में से 25 में सत्ता में आने के लिए तैयार है, जिनमें मुंबई भी शामिल है, जहां 15 जनवरी को चुनाव हुए थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नगर निगम चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगियों की शानदार जीत पर मतदाताओं को धन्यवाद दिया.
मुंबई और 28 अन्य नगर निगमों में 15 जनवरी को हुए चुनावों में वोटों की गिनती शुक्रवार सुबह शुरू हुई और देर रात तक जारी रही.
कुछ सीटों के नतीजे आना बाकी
इन 29 नगर निकायों की 2,868 सीटों में से 2,833 सीटों के परिणाम भी घोषित कर दिए गए हैं. शेष 35 सीटों के संबंध में मध्यरात्रि तक एसईसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था.
बीजेपी ने 1400 सीटें जीतीं और उसकी सहयोगी शिवसेना ने 397 सीटें हासिल कीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) को 153 और एमएनएस को राज्य में 13 सीटें मिलीं. कांग्रेस ने 324 सीटें जीतीं.
बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 118 सीटें जीतकर 227 सदस्यीय बीएमसी में 114 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है. बीएमसी भारत का सबसे अमीर निकाय है, जिसका 2025-26 के लिए बजट 74,427 करोड़ रुपये का है. पूरे चांस हैं कि इसबार BMC में बीजेपी का मेयर बनेगा.
ठाणे में, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह क्षेत्र है, उनकी शिवसेना ने महायुति के लिए जीत हासिल की और 131 सीटों में से 75 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी बीजेपी ने 28 सीटें जीतीं.
राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि 29 नगर निकायों में मतदान प्रतिशत 54.77 रहा.
बीएमसी की सत्ता के लिए हुए इस बहुचर्चित चुनाव में ठाकरे परिवार के चचेरे भाई दो दशकों बाद फिर से एक साथ आए, लेकिन अब तक घोषित परिणामों से संकेत मिलता है कि उनकी उम्मीदें धराशायी हो गईं.
पुणे और पड़ोसी पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों में, बीजेपी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और एनसीपी (एसपी) गठबंधन से काफी आगे निकलकर एक बड़ी जीत की ओर बढ़ती दिखी.
इस परिणाम से मुंबई की सत्ता संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है. वर्षों से, बीएमसी को ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का अजेय गढ़ माना जाता था.
पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 में हुई हत्या के आरोपी श्रीकांत पंगारकर, स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर जालना नगर निगम में पार्षद चुने गए.
नागपुर नगर निगम के चुनाव परिणाम
नागपुर में, जो मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है, परिणामों से पता चला कि आक्रामक अभियान के बावजूद कांग्रेस को महत्वपूर्ण पैठ बनाने में संघर्ष करना पड़ा.
नागपुर नगर निगम की 151 सदस्यीय विधानसभा की सभी 151 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं. बीजेपी को 102 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 34 सीटें प्राप्त हुईं.
लातूर नगर निगम के चुनाव परिणाम
वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने लातूर नगर निगम के चुनाव में जीत हासिल की और 70 सदस्यीय निकाय में 43 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया, जबकि बीजेपी 22 सीटों के साथ काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही.
अजित और शरद पवार को तगड़ा झटका
चुनावों से पहले राजनीतिक घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब पिछले महीने उद्धव और राज ठाकरे फिर से एक साथ आए और प्रतिद्वंद्वी एनसीपी गुटों - उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) ने भी पुणे और पिंपरी-चिंचवड में स्थानीय गठबंधन बनाया.
पुणे में बीजेपी ने 96 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी को 20 सीटें मिलीं और एनसीपी (एसपी) केवल तीन सीटें ही हासिल कर पाई.
पिंपरी चिंचवाड़ में बीजेपी ने 84 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी दूसरे स्थान पर सिमट गई और उसे 37 सीटें ही मिलीं. एनसीपी (एसपी) वहां एक भी सीट नहीं जीत सकी.
कांग्रेस का दबदबा कम हुआ, AIMIM को बढ़त
शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस का दबदबा स्पष्ट रूप से टूट गया, और बीएमसी चुनावों में उसे एक नया निम्न स्तर देखने को मिला, जहां उसने 10 प्रतिशत से भी कम सीटें जीतीं.
दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नगर निगम चुनावों में अप्रत्याशित रूप से विजयी होकर उभरी, जिसने राज्य भर के मुस्लिम बहुल वार्डों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की.
एआईएमआईएम के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा कि पार्टी राज्य भर में 100 सीटों पर जीत हासिल करने के लिए तैयार है और उसे मुंबई में कुछ सीटें हासिल करने के अलावा छत्रपति संभाजीनगर, धुले, अमरावती, जालना, मालेगांव और परभणी में मजबूत समर्थन मिला है.
कई वर्षों के अंतराल के बाद हुए चुनावों में शामिल 29 नगर निकायों में से 19 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की, जिनमें से अधिकांश का कार्यकाल 2020 और 2023 के बीच समाप्त हुआ था. इनमें से नौ नगर निकाय मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में आते हैं, जो भारत का सबसे अधिक शहरी क्षेत्र है.
जिन नगर निगमों में चुनाव हुए थे उनके नाम- मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी.
aajtak.in