महाराष्ट्र में विपक्षी एकता में दरार? सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर शिवसेना-एनसीपी में खींचतान

कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद विपक्षी एकता को लेकर जोर-आजमाइश तेज हो गई है. लेकिन, इस एकता को लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में बरकरार रखना बड़ी चुनौती बन गया है. यहां महाविकास अघाड़ी के दो दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर सीधे टकराव देखा जा रहा है. इस विवाद में कांग्रेस भी कूद गई है. उसने भी ज्यादा सीटों को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर कर दी है.

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NCP प्रमुख शरद पवार और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे. (फाइल फोटो) NCP प्रमुख शरद पवार और पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे. (फाइल फोटो)

ऋत्विक भालेकर

  • मुंबई,
  • 22 मई 2023,
  • अपडेटेड 4:38 PM IST

कर्नाटक में कांग्रेस की जबरदस्त जीत के बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को एकजुट करने के मिशन पर हैं. दूसरी तरफ महाराष्ट्र में उद्धव गुट की शिवसेना और एनसीपी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है. ऐसे में विपक्षी एकता के प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं और महाविकास अघाड़ी (MVA) में एक बार फिर दरार पड़ते देखी जा रही है.

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उद्धव गुट के शिवसेना सांसद संजय राउत ने दादरा नगर हवेली समेत 19 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया है. दादरा नगर हवेली सीट को शिवसेना ने 2021 के उपचुनाव में जीता है. पार्टी में दल-बदल के बाद उद्धव खेमे को भरोसा है कि उनके पास बीजेपी के खिलाफ भारी सहानुभूति की लहर है और इसका फायदा एमवीए को होगा, इसलिए उन्हें उन 18 सीटों पर लड़ना चाहिए जो उन्होंने पिछले चुनावों में जीती हैं.

'संजय की बयानबाजी से NCP के नेता नाराज!'

शिवसेना नेताओं ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में उद्धव की रैलियों को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. ऐसे में पार्टी को ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने और जीतने की पूरी उम्मीद है. हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर एमवीए में चर्चा से पहले संजय राउत के आक्रामक रुख से माहौल गरमा गया है. संजय की बयानबाजी के बाद एनसीपी के नेता पूरी तरह से खफा नजर आ रहे हैं.

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'खुद को जमीनी तौर पर मजबूत मान रही NCP'

दरअसल, शरद पवार की पार्टी एनसीपी को लगता है कि उनके पास जमीनी तौर पर मजबूत कैडर है और कांग्रेस और शिवसेना की तुलना में ज्यादा विधायक हैं. एनसीपी के 54 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं. वहीं, उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना में दलबदल के बाद विधानसभा में उनकी संख्या घटकर 14 रह गई.

'किसी सीट पर एकाधिकार नहीं होना चाहिए'

विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को संजय राउत के बयान पर पलटवार किया और कहा- किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में किसी भी पार्टी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए. एक पार्टी के रूप में आपको लोगों को विश्वास दिलाना चाहिए. बताते चलें कि पिछले लोकसभा चुनाव (2019) में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने महाराष्ट्र में 18 सीटें जीती थीं. इसमें से शिवसेना ने कांग्रेस के खिलाफ 8 और एनसीपी के खिलाफ 8 सीटें जीतीं थी. मावल लोकसभा क्षेत्र में अजित पवार के बेटे पार्थ शिवसेना के उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे.

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'अब हम मजबूत और बड़े हो गए हैं'

अजित पवार ने आगे कहा कि हम एमवीए (महा विकास अघाड़ी) का हिस्सा हैं. एकजुट और मजबूत रहना हमारा कर्तव्य है, लेकिन एमवीए में आपको तभी महत्व मिलेगा, जब आप जमीनी स्तर पर मजबूत हों. अतीत में कांग्रेस हमेशा एनसीपी से ज्यादा सीटें जीतती रही है, इसलिए हमें छोटे भाई की तरह ट्रीट किया गया है, लेकिन अब हम मजबूत और बड़े हो गए हैं, क्योंकि हमने 2019 के विधानसभा चुनावों में 54 सीटें जीती हैं, कांग्रेस ने 44 और शिवसेना ने क्रमशः 56 सीटें जीती हैं. यही गणित है.

'शरद पवार ने MVA नेताओं की बैठक बुलाई'

एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना नेताओं ने बताया कि कर्नाटक की जीत के बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने एमवीए नेताओं की बैठक बुलाई और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की, लेकिन सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है. वहीं, सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों सहयोगियों के बीच तीखी बयानबाजी के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी है. 

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'हमें कुछ चीजों को बदलने की जरूरत'

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, हर पार्टी को जमीनी हकीकत या अपनी ताकत को परखने का अधिकार है, लेकिन सीट बंटवारे का फैसला मेरिट के आधार पर होगा. निर्वाचन क्षेत्र पर एकाधिकार मुद्दा नहीं होना चाहिए. हमें जरूरत के तौर पर कुछ चीजों को बदलने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक, दलित और अन्य पिछड़े वर्ग पार्टी की रीढ़ हैं. उन्होंने हमेशा किसी अन्य पार्टी के बजाय कांग्रेस को चुना और इसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस ने लंबे समय तक राज्य पर शासन किया, इसलिए मेरिट और स्ट्रेंथ के आधार पर सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय होना चाहिए.

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'कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद'

पटोले ने आगे कहा, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से कर्नाटक में कांग्रेस को फायदा हुआ है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व महाराष्ट्र में भी यही उम्मीद कर रहा है. कसबा पैठ में उपचुनाव में कांग्रेस की जीत एक हालिया उदाहरण है.

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'शिवसेना ने कांग्रेस और NCP को 16 सीटों पर हराया'

बताते चलें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने 18 सीटें जीती थीं. जबकि एनसीपी ने 4 और कांग्रेस को सिर्फ चंद्रपुर सीट पर जीत मिली थी. शिवसेना ने 16 सीटों पर कांग्रेस और एनसीपी के खिलाफ जीत हासिल की थी. इनमें...

1. रामटेक
2. यवतमाल वाशिम
3. हिंगोली
4. परभणी
5. नासिक
6. पालघर
7. कल्याण
8. ठाणे
9. मुंबई उत्तर पश्चिम
10. मुंबई दक्षिण मध्य
11. मुंबई दक्षिण
12. मावल
13. शिर्डी
14. उस्मानाबाद (धाराशिव)
15. रत्नागिरी
16. कोल्हापुर

(अभिजीत कारंडे के इनपुट्स के साथ)

 

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