कट्टर विरोधी AIMIM और कांग्रेस संग BJP के अजब गठबंधन की पूरी कहानी, अब 'डैमेज कंट्रोल' में जुटीं पार्टियां

महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों विचारधारा नहीं, सहूलियत का बोलबाला दिखा. नगर निकाय चुनावों से पहले धुर विरोधी दल सत्ता के लिए एक-दूसरे से गले मिलते दिखे. अंबरनाथ और अकोट में बने असहज गठबंधनों ने सहूलियत की सियासत को उजागर किया है, जहां कुर्सी के आगे सिद्धांत बौने पड़ते नजर आए.

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अंबरनाथ और अकोट में हुआ गजब खेल (फोटो- ITG) अंबरनाथ और अकोट में हुआ गजब खेल (फोटो- ITG)

दीपेश त्रिपाठी

  • मुंबई,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:53 PM IST

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में सियासी गणित ने इस बार नई इबारत लिख दी. धुर विरोध की दीवारें लांघते हुए बीजेपी ने दो नगर परिषदों में कांग्रेस और एआईएमआईएम से हाथ मिला लिया. मगर जब दिल्ली और मुंबई तक कानाफूसी तेज हुई, तो सीनियर नेताओं को बीच में आकर इस सियासी ‘मिलन’ पर ब्रेक लगाना पड़ा.

इस कदम ने न सिर्फ सत्ताधारी महायुति बल्कि विपक्षी खेमे में भी असहजता पैदा कर दी. हालात ऐसे बने कि कांग्रेस को एक स्थानीय निकाय में अपने ही 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को निलंबित करना पड़ा.

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया कि इस तरह के गठबंधन पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना किए गए और यह अनुशासनहीनता के दायरे में आते हैं. वहीं, बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने इसे खुले तौर पर 'गठबंधन धर्म' के साथ विश्वासघात करार दिया.

अंबरनाथ और अकोट नगर परिषद में हुआ 'प्रयोग' 

20 दिसंबर को हुए स्थानीय चुनावों के बाद बीजेपी ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ के बैनर तले अंबरनाथ नगर परिषद का नेतृत्व गठित किया. इस राजनीतिक जोड़-तोड़ में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सहयोगी शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया गया.

इसी तरह का प्रयोग अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में भी देखने को मिला, जहां बीजेपी ने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और अन्य दलों के साथ हाथ मिला लिया.

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वहीं, किरकिरी के बाद कांग्रेस ने बुधवार को अंबरनाथ नगर परिषद के 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और उनके ब्लॉक अध्यक्ष को बीजेपी के साथ गठबंधन करने के आरोप में निलंबित कर दिया.

शिवसेना (यूबीटी) ने भी बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सत्ताधारी पार्टी के दोहरे मापदंड को उजागर करता है और दिखाता है कि सत्ता के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है.

अंबरनाथ में शिंदे की शिवसेना थी सबसे बड़ी पार्टी

अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ चुनाव के बाद समझौता कर 31 सीटों का बहुमत जुटाया, जबकि शिवसेना (शिंदे) 27 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. 60 सदस्यीय परिषद के चुनावों में शिवसेना ने 27 सीटें जीती थीं, जो बहुमत से चार कम थीं. बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12 और एनसीपी को चार सीटें मिली थीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुने गए थे.

एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से तीन-दलीय गठबंधन की ताकत बढ़कर 32 तक पहुंच गई, जो बहुमत के आंकड़े 30 से आगे निकल गई. बीजेपी पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराकर परिषद अध्यक्ष का चुनाव जीता और बुधवार को शपथ ली.

हालांकि, यह स्थानीय स्तर का फैसला इसमें शामिल किसी भी पार्टी के राज्य नेतृत्व को रास नहीं आया. कांग्रेस ने अंबरनाथ में 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया. पार्टी का कहना है कि बीजेपी के साथ गठबंधन का फैसला राज्य नेतृत्व को बताए बिना लिया गया.

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कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है और यह मोर्चा बिना अनुमति के बनाया गया था.

वहीं, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं है और स्थानीय नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं.

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अकोट और अंबरनाथ के घटनाक्रम को बीजेपी का गैरजिम्मेदाराना रवैया बताया और कहा कि सत्ता हथियाने के लिए पार्टी किसी से भी हाथ मिला सकती है.

बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति के सहयोगी हैं, लेकिन शिवसेना ने इन गठबंधनों को 'अनैतिक और अवसरवादी' करार दिया था. शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे 'गठबंधन धर्म' के खिलाफ और बीजेपी के 'कांग्रेस-मुक्त भारत' के नारे से उलट बताया.

बीजेपी पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल, जिन्हें समूह का नेता नियुक्त किया गया था, उन्होंने दावा किया कि गठबंधन अंबरनाथ को 'भ्रष्टाचार' से मुक्त कराने के लिए किया गया था.

एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि जिन दलों के खिलाफ चुनाव लड़ा जाता है, उनके साथ सत्ता के लिए हाथ मिलाना ठीक नहीं. उन्होंने कहा कि सत्ता ही सब कुछ नहीं होती.

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ओवैसी बोले- बीजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं

अकोला के अकोट में बीजेपी ने मेयर पद तो जीत लिया था लेकिन 35 सीटों वाली म्यूनिसपैलिटी में बीजेपी के पास 11 सीटें ही थीं. कुर्सी पर कब्जा बनाए रखने के लिए बीजेपी ने AIMIM के 5, शिवसेना के 1, उद्धव की पार्टी के 1, एनसीपी के 2, शरद पवार की पार्टी के 1 और प्रहार जनशक्ति दल (बच्चू काडू) के 3 सदस्यों का गठबंधन बनाकर 25 का बहुमत प्राप्त कर लिया. गठबंधन का नाम रखा गया अकोट विकास मंच. गठबंधन डीएम दफ्तर में रजिस्टर भी हो गया. बीजेपी पार्षद रवि ठाकुर इसके संयोजक बन गए और 13 जनवरी को होने वाले डिप्टी मेयर चुनाव में उनका व्हीप AIMIM भी मानेगी. जबकि अकोट में उसी एमआईएम की फिरोजाबी सिकंदर राणा को हराकर बीजेपी की माया धुले मेयर बनी हैं.

बीजेपी के अकोला सांसद अनुप धोत्रे ने दावा किया कि एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए. वहीं, एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा कि उनकी पार्टी का राजनीतिक रुख बीजेपी के खिलाफ है और उन्होंने अकोट में स्थिति की जानकारी मांगी है. उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी ने साफ किया है कि उनकी पार्टी बीजेपी के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी.

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अकोला के बीजेपी विधायक रणधीर सावरकर ने दावा किया कि एआईएमआईएम के पांच में से चार पार्षदों ने पार्टी के रुख को खारिज कर अकोट विकास मंच का समर्थन किया. इस बीच बीजेपी की माया धुले ने एआईएमआईएम के फिरोजाबी सिकंदर राणा को हराकर मेयर का चुनाव जीता, जबकि बीजेपी के रवि ठाकुर को ग्रुप लीडर बनाया गया.

किरकिरी के बाद भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने तुरंत अकोट विधानसभा विधायक प्रकाश भारसाकले को पत्र लिखा.

पत्र में रविंद्र चव्हाण ने कहा कि पार्टी की स्थापित नीति को कमजोर किया गया है और किसी को विश्वास में लिए बिना ऐसा निर्णय लेने से पार्टी की छवि धूमिल हुई है. उन्होंने आगे मांग की कि विधायक तत्काल स्पष्टीकरण दें कि निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए.

कांग्रेस छह सीटों और वंचित बहुजन अघाड़ी दो सीटों के साथ विपक्ष में रही. शिवसेना (यूबीटी) नेता सचिन अहीर ने एक बार फिर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये घटनाक्रम सत्ता के लिए अपनाए जा रहे दोहरे मापदंडों को उजागर करते हैं.

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