महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की बुधवार सुबह बारामती में हुए विमान हादसे में मौत को लेकर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है. जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटनाग्रस्त हुआ बॉम्बार्डियर लियरजेट-45 पूरी तरह उड़ान योग्य था और उसमें किसी भी तरह की तकनीकी या यांत्रिक खराबी नहीं पाई गई.
प्रारंभिक जांच के अनुसार, विमान को उड़ाने वाले दोनों पायलट न सिर्फ लाइसेंसधारी थे, बल्कि चिकित्सकीय रूप से भी पूरी तरह फिट थे. हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई थी, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई. अजित पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को बारामती के काटेवाड़ी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
दुर्घटनाग्रस्त विमान, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-SSK था और जिसे VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड संचालित कर रही थी, के पास एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट मौजूद था. यह प्रमाणपत्र 10 सितंबर 2025 को जारी किया गया था और 14 सितंबर 2026 तक वैध था.
विमान के पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर के पास 15,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव था, जबकि को-पायलट संभवी पाठक के पास लगभग 1,500 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था. दोनों पायलटों ने वर्ष 2025 में अपनी प्रोफिशिएंसी जांच और मेडिकल टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए थे, जो 2026 तक मान्य हैं.
यह हादसा उस वक्त हुआ जब अजित पवार जिला परिषद चुनावों के प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे. विमान ने सुबह करीब 8:30 बजे बारामती एयरपोर्ट पर पहली बार लैंडिंग का प्रयास किया, लेकिन खराब दृश्यता के कारण गो-अराउंड करना पड़ा.
800 मीटर की विजिबिलिटी और वो आखिरी 60 सेकंड
सूत्रों के अनुसार, सुबह घने कोहरे के कारण दृश्यता घटकर करीब 800 मीटर रह गई थी. दूसरी बार सुबह 8:42 बजे विमान ने लैंडिंग का प्रयास किया, जिसके बाद वह रडार से गायब हो गया और रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
सरकारी बयान में कहा गया है कि विमान को सुबह 8:43 बजे रनवे-11 पर उतरने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पायलटों की ओर से रीड-बैक नहीं मिला. इसके ठीक एक मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को रनवे के पास आग की लपटें दिखाई दीं.
सीसीटीवी फुटेज में विमान को एक स्थानीय दुकान के पीछे गिरते और फिर तेज धमाके के साथ आग के गोले में तब्दील होते देखा गया. हादसे से पहले किसी भी तरह का मेडे कॉल या डिस्ट्रेस सिग्नल रिकॉर्ड नहीं हुआ. इस मामले की विस्तृत जांच अब डीजीसीए और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहे हैं.
श्रेया चटर्जी