अब मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग की अनुमति के बगैर अफसरों के तबादले नहीं हो सकेंगे. राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कान्ता राव ने बताया कि 26 दिसम्बर के बाद निर्वाचन आयोग की बिना अनुमति के कोई भी अफसर का स्थानांतरण नहीं होगा. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि आने वाले कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव हैं. इस कारण निर्वाचन कार्य में लगे अफसरों के तबादले चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं किए जा सकेंगे.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी एल कान्ता राव ने आगे बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का स्थानांतरण राज्य शासन के द्वारा नहीं किया जा सकेगा. इसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी. इसके बाद ही किसी भी अफसर का स्थानांतरण हो सकेगा.
ने सरकार बनते ही अफसरों के किये थे ताबड़तोड़ तबादले....
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने ताबड़तोड़ फैसले लेते हुए 26 जिलों के समेत कुल 42 अफसरों के तबादले के आदेश जारी कर दिए थे. इस क्रम में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा के डीएम का भी तबादला कर दिया था.
सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनाव के मद्देनजर ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सरकार के नजदीकी अफसरों पर ही तबादले की गाज गिराई है. आपको बता दें कि इस तबादले के संकेत कमलनाथ पहले भी कई बार चुनाव प्रचार के दौरान दे चुके थे.
जब कमलनाथ की चक्की चलती है तो बारीक पीसती है...
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कमलनाथ ने बीजेपी के लिए काम करने वाले अफसरों को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि, ''जो सरकारी कर्मचारी बीजेपी का बिल्ला जेब में लेकर घूमता है. उसे हमारी सरकार आने पर देख लिया जाएगा. उन्होंने कहा था कि इसलिए याद रखें कमलनाथ की चक्की देर से चलती है पर बहुत बारीक पीसती है.''
22 फरवरी निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन...
चुनाव आयोग के मुताबिक, एक जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सभी पात्र नागरिकों का नाम निर्वाचक नामावली में शामिल किया जाएगा. 26 दिसम्बर से 25 जनवरी तक प्राप्त समस्त दावे-आपत्तियों का निराकरण 11 फरवरी तक करने के बाद निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 22 फरवरी को किया जाएगा.
आदित्य बिड़वई