MP: 12 साल की मुशरिफ खान फर्राटे से सुनाती है भगवद गीता के 500 श्लोक   

12 साल की मुशरिफ ने मेमोरी रिटेंशन कोर्स के लिए भगवद गीता को चुना. अब वो भगवद गीता के 701 में से 500 श्लोकों को फर्राटे से सुनाती है. इस मेमोरी रिटेंशन तकनीक को सीखने में मुशरिफ की वैदिक गणित टीचर रोहिणी मेनन ने उनकी मदद की.

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12 वर्षीय मुशरिफ खान.(फोटो-आजतक) 12 वर्षीय मुशरिफ खान.(फोटो-आजतक)

रवीश पाल सिंह / पवन शर्मा

  • छिंदवाड़ा,
  • 01 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 3:16 PM IST
  • गीता के 701 में से 500 श्लोकों को फर्राटे से सुनाती हैं
  • मुशरिफ को कुरान की आयतें भी याद
  • आठवीं कक्षा की छात्रा हैं मुशरिफ खान

आध्यात्मिक ज्ञान हासिल करने की चाह हो तो धर्म उस रास्ते में बाधा नहीं बनता. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की रहने वाली आठवीं कक्षा की छात्रा मुशरिफ खान इसकी बेहतरीन मिसाल है. मुशरिफ को भगवद गीता के 500 श्लोक मौखिक रूप से याद हैं. उनको सिर्फ श्लोक कंठस्थ ही नहीं इनके मायने भी अच्छी तरह पता हैं.

12 साल की मुशरिफ ने मेमोरी रिटेंशन कोर्स के लिए भगवद गीता को चुना. अब वो भगवद गीता के 701 में से 500 श्लोकों को फर्राटे से सुनाती हैं. इस मेमोरी रिटेंशन तकनीक को सीखने में मुशरिफ की वैदिक गणित टीचर रोहिणी मेनन ने मदद की.

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रोहिणी मेनन के मुताबिक उन्होंने मेमोरी रिटेंशन तकनीक के लिए मुशरिफ को तीन विकल्प दिए थे- पूरी डिक्शनरी याद करना या पूरा संविधान या भगवद गीता. मुशरिफ ने भगवद गीता को चुना. रोहिणी बताती हैं कि “मुशरिफ ने क्लास 6 से भगवद गीता के श्लोकों को याद करना शुरू किया.  और स्टूडेंट्स ने भी इस विकल्प को चुना लेकिन सिर्फ मुशरिफ ही अब तक 500 श्लोक याद करने में सफल हुई, मुशरिफ बाकी बचे हुए श्लोकों को याद करने के साथ और उनके मायने को जल्दी से जल्दी समझना चाहती हैं.

मुशरिफ का कहना है कि “मैं मेमोरी रिटेंशन के शॉर्ट कोर्स के बाद कुछ अलग करना चाहती थी. इसलिए मैंने भगवद गीता को चुना. मेरी मां ने मुझे हमेशा सिखाया है कि घर के बाहर हम सिर्फ इंसान हैं. मेरे माता-पिता ने मुझे भगवद गीता सीखने की अनुमति दी क्योंकि वो चाहते थे कि मैं हर धर्म की जानकारी हासिल करूं.”

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मुशरिफ को कुरान की आयतें भी याद हैं. मुशरिफ का कहना है कि गीता, कुरान शरीफ और बाइबल सभी एक संदेश देते हैं कि इंसानियत ही सबसे ऊपर है, हर धर्म हमें भाईचारे से रहने की सीख देता है.

मुशरिफ की उपलब्धि से उसके माता-पिता भी बहुत खुश हैं. मुशरिफ की मां जीनत खान कहती हैं कि वो अपनी बेटी की परवरिश इस तरह करना चाहते हैं कि वो बड़ी होकर बेहतर इनसान बने और हर धर्म की अच्छी बातों को सीखे.

जीनत खान ने ये भी कहा, ‘मेरी बेटी ने जो भी मेहनत की है उसका सही एडवाटेंज मिले. उसने एकता बढ़ाने का काम किया है. दूसरे धर्मग्रंथ को पढ़ने में गलत जैसा कुछ नहीं है. मेरी बच्ची की मेहनत को देखा जाए, उसकी टीचर की मेहनत को देखा जाए. इनकी सराहना की जाए. राजनीति को इससे दूर रखा जाए और इसे कोई और रंग न देने की कोशिश की जाए.’

 

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