MP कांग्रेस में CM बनने के चेहरे की जंग, दिग्गी विरोधी एकजुट

मध्य प्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय सिंह, सत्यव्रत चतुर्वेदी और सुरेश पचौरी जैसे बड़े नेता है. लेकिन कांग्रेस के इन सभी दिग्गज नेताओं के बीच शह-मात का खेल चलता रहता है. अब राज्य में कांग्रेस की ओर से CM पद का चेहरा बनने की कवायद तेज हो गई है.

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में होना है, लेकिन सियासी बिसात अभी से ही बिछाई जाने लगी है. कांग्रेस पिछले डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है और सत्ता की वापसी के लिए आतुर नजर आ रही है. इसके बावजूद कांग्रेस के साथ एक बड़ी संकट पार्टी में गुटबाजी है, जो सत्ता की वापसी में उसकी सबसे बड़ा रोड़ा है.

MP कांग्रेस में शह-मात का खेल 

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दरअसल मध्य प्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, , अजय सिंह, सत्यव्रत चतुर्वेदी और सुरेश पचौरी जैसे बड़े नेता है. लेकिन कांग्रेस के इन सभी दिग्गज नेताओं के बीच शह-मात का खेल चलता रहता है. अब राज्य में कांग्रेस की ओर से CM पद का चेहरा बनने की कवायद तेज हो गई है.

शिवराज के खिलाफ CM का चेहरा कौन

राज्य की सत्ता पर पिछले 14 साल से बीजेपी काबिज और शिवराज सिंह चौहान 12 साल मुख्यमंत्री है. पिछले कुछ दिनों शिवराज सिंह के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर उठ रही है. ऐसे में कांग्रेस को सत्ता में वापसी की उम्मीद नजर आने लगी है. इसीलिए कांग्रेस के नेता राज्य में पार्टी का चेहरा बनने के लिए हाथ पैर मारने लगे है.

सिंधिया को CM चेहरे बनाने में जुटे कमलनाथ

ग्वालियर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमल नाथ खुलकर खड़े हो गए हैं. कमल नाथ ने कहा कि अगर पार्टी मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को पेश करती है तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. पिछले दिनों भी उन्होंने CM के तौर पर ज्योतिरादित्या सिंधिया के नाम को आगे बढ़ाया था. उन्होंने कहा कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस पर अंतिम फैसला लेंगे.

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कमल नाथ को मिल सकती है प्रदेश अध्यक्ष की कमान

सूत्रों की माने कांग्रेस आलाकमान कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस के तौर पर नियुक्त करने को लेकर विचार कर रहा है. मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव बहुत बहुत सक्रिय नेता के तौर पर अपना असर नहीं छोड़ पाए हैं. इसीलिए पार्टी आलाकमान उनके हाथों से कमान लेकर कमल नाथ को सौंप सकता है. इसी कड़ी में पिछले दिनों MP के प्रभारी पद से मोहन प्रकाश को हटाया गया था. मोहन प्रकाश के हाथों से राज्य का प्रभार लिए जाने के पीछ कमल नाथ की भूमिका रही है.

दिग्विजय विरोधी हुए एकजुट

दिग्विजय सिंह को सियासी विरोधी माने जाने वाले प्रदेश के बड़ी नेता एक जुट होने लगे है. इसमें कमल नाथ, सत्यवृत चतुर्वेदी और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आपस में हाथ मिला लिया है. इसी रणनीति के तहत कमल नाथ ने ज्योतिरादित्य के नाम को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मेरे पास कोई समस्या नहीं है. उन्होंने गूना और मुंगाली दोनों जगह यही बात दोहराई नाथ ने कहा कि पार्टी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करने में कोई कठिनाई नहीं है, बस उपयुक्त समय पर निर्णय लिया जाएगा.

सिंधिया- कमलनाथ की जोड़ी

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मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले बनाने का मन कांग्रेस का कर रही है. यही वजह है कि कमलनाथ ने कहा कि सिंधिया के साथ राजनीतिक संबंध के साथ-साथ परिवारिक संबंध भी है ऐसे में उनके नाम पर मुझे कोई समस्या नहीं है. पिछले दिनों कमलनाथ और सिंधिया एक साथ गुना से दिल्ली से आए. दोनों नेता पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह कलुखेड़ा की शोक सभा में भाग लेने के लिए मुंगाली गए थे, जिनका पिछले दिनों निधन हो गया था.

दिग्विजय की नर्मदा यात्रा में छिपा है सियासी राज

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी नर्मदा यात्रा पर निकल रहे हैं. दिग्गी भले ही अपनी यात्रा को राजनीतिक मकसद से परे बता रहे हों, लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उनकी यात्रा ने को राजनीतिक जनाकार मानते हैं कि वह अपनी सियासी जमीन मापने के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं. नर्मदा के किनारे-किनारे अपनी 3300 किलोमीटर की यात्रा के दौरान दिग्गी मध्यप्रदेश की 110 विधानसभा सीटों और गुजरात की 20 विधानसभा सीटों से गुजरेंगे. हालांकि दिग्गी राज्य की राजनीति में लौटने से इंकार करते रहे हैं.

दिग्विजय चाहते थे MP का प्रभार

बता दें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश का विधानसभा चुनाव 2003 में हारने के बाद कहा था कि, वो अगले 10 साल कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे और उन्होंने उसका पालन भी किया. 2004 से वो पार्टी के महासचिव हैं, लेकिन कुछ महीने पहले उन्होंने सोनिया गांधी से मिलकर सभी राज्यों का प्रभार लेने की गुजारिश की थी. पर पार्टी आलाकमान ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया था.

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