झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल से बेहद दुखद खबर सामने आई है. मनोहरपुर प्रखंड के जराइकेला थाना क्षेत्र के तिरिलपोशी स्थित सिंहबोंगा जंगल में मंगलवार शाम नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी बम में विस्फोट हो गया. इस विस्फोट की चपेट में आकर दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए. बताया जा रहा है कि धमाका इतना तेज था कि दोनों के पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई.
ग्रामीणों के मुताबिक, घायल होने के बाद दोनों को समय पर इलाज नहीं मिल सका. वे लंबे समय तक गांव में ही बिना किसी चिकित्सा सहायता के पड़े रहे. प्रशासन भी उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थान पर इलाज के लिए नहीं पहुंचा सका. आखिरकार इलाज के अभाव में दोनों ने दम तोड़ दिया. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.
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मृतकों की पहचान और गांव में शोक
मृतकों की पहचान तिरिलपोशी निवासी जयसिंह चेरवा और सिलाए चेरवा के रूप में हुई है. विस्फोट के बाद दोनों दर्द से तड़पते रहे, लेकिन उन्हें अस्पताल नहीं ले जाया जा सका. बुधवार तक वे घायल अवस्था में गांव में ही पड़े रहे. समय पर उपचार न मिलने के कारण उनकी जान चली गई. इस घटना ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है.
गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है. लोगों का कहना है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो शायद दोनों की जान बचाई जा सकती थी. इस घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सारंडा में आईईडी का खौफ
ज्ञात हो कि सारंडा के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा जगह-जगह आईईडी बम लगाए जाने की सूचना पहले भी मिलती रही है. इन विस्फोटकों की चपेट में आकर कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं. सुरक्षा बलों के जवान भी हताहत हुए हैं. यहां तक कि जंगली जानवर और मवेशी भी इन बमों का शिकार बन रहे हैं.
इलाके में आईईडी का इतना खौफ है कि सुरक्षा बलों को भी बेहद सतर्क होकर कदम बढ़ाने पड़ते हैं. इससे राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ नक्सल विरोधी अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं.
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, सारंडा जंगल में माओवादी संगठन बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं. किसी बड़ी साजिश की आशंका को देखते हुए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं. माना जा रहा है कि इसी अभियान को रोकने के लिए नक्सलियों ने बड़े पैमाने पर आईईडी बिछाए हैं.
लेकिन इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत आम ग्रामीण चुका रहे हैं. न उन्हें समय पर सुरक्षा मिल पा रही है और न ही इलाज. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण भय और असुरक्षा के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं.
सत्यजीत कुमार