चाईबासा, चक्रधरपुर और राउरकेला रेलवे स्टेशनों पर तत्काल टिकट को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां आम यात्रियों को टिकट मिलना मुश्किल होता जा रहा है. चक्रधरपुर रेलमंडल के राउरकेला स्टेशन पर आरोप है कि पिछले कई महीनों से रिजर्वेशन काउंटरों पर दलालों का कब्जा है. कथित तौर पर आरपीएफ और कमर्शियल क्लर्क की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है, जिसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, दलालों के इशारे पर रात करीब 10 बजे से ही रिजर्वेशन काउंटर के बाहर उनके लोग लाइन में लग जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि लाइन में रोजाना वही चेहरे नजर आते हैं, जो कथित रूप से दलालों के लिए जगह घेरते हैं. बताया जा रहा है कि राउरकेला स्टेशन के मुख्य द्वार पर स्थित तीन टिकट काउंटर और सेकेंड एंट्री के एक काउंटर पर तत्काल टिकट के समय दलालों का पूरा कब्जा हो जाता है.
इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें आपातकालीन यात्रा के लिए तत्काल टिकट नहीं मिल पाता. मजबूरी में यात्रियों को दलालों के माध्यम से महंगे दामों पर टिकट खरीदना पड़ रहा है.
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दलालों का नेटवर्क और वसूली का खेल
मामला केवल राउरकेला तक सीमित नहीं है. पानपोश, कलूंगा और बीरमित्रपुर रेलवे स्टेशनों पर भी दलालों के सक्रिय होने की बात सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, आरपीएफ द्वारा राउरकेला के चार काउंटरों से रोजाना करीब 4 हजार रुपये की वसूली की जाती है.
वहीं, पानपोश से प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये, कलूंगा से 15 हजार रुपये और बीरमित्रपुर से करीब 20 हजार रुपये की कथित उगाही की चर्चा है. इस तरह हर महीने कुल अवैध वसूली लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये तक पहुंच जाती है, जिसका आपस में बंटवारा किया जाता है.
आरोप है कि आरपीएफ दलालों को कार्रवाई से बचाती है और तत्काल टिकट के समय काउंटर को उनके कब्जे में छोड़ देती है. वहीं काउंटर पर बैठा क्लर्क भी दलालों के टिकट निकालने के एवज में प्रति यात्री 500 से 1000 रुपये तक वसूलता है.
सिस्टम में मिलीभगत के आरोप
बताया जा रहा है कि इस अवैध वसूली से क्लर्कों को भी रोजाना हजारों रुपये की कमाई होती है, जो 5 हजार से 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. आरोप है कि यह रकम ऊपर तक पहुंचती है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीरमित्रपुर में टिकटों की कालाबाजारी का कथित मास्टरमाइंड चक्रधरपुर रेलमंडल के कमर्शियल विभाग का ही एक कर्मचारी बताया जा रहा है. इसके चलते मिलीभगत की आशंका और गहरी हो जाती है.
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि रोजाना एक ही लोगों को लाइन में देखने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. यात्री वीडियो और फोटो लेकर सोशल मीडिया पर शिकायत भी करते हैं, लेकिन दलालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती.
आम यात्रियों की बढ़ती परेशानी
टिकट दलालों का यह नेटवर्क पूरी तरह संगठित बताया जा रहा है. कुछ लोग रात से ही काउंटर के बाहर सोकर लाइन पकड़ लेते हैं और सुबह टिकट काउंटर खुलते ही अपने ग्राहकों के लिए टिकट ले लेते हैं.
इसके बदले उन्हें पैसे दिए जाते हैं. इस व्यवस्था के कारण आम यात्रियों को तीन गुना तक अधिक कीमत देकर टिकट खरीदना पड़ रहा है, क्योंकि लाइन में लगने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं मिल पाता.
इस स्थिति से यात्रियों में भारी नाराजगी है और वे लगातार इस पूरे मामले की शिकायत कर रहे हैं.
जांच और कार्रवाई पर सवाल
बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर पहले भी कई शिकायतें हो चुकी हैं और मीडिया में खबरें भी आई हैं. दक्षिण पूर्व रेलवे के गार्डन रीच, कोलकाता मुख्यालय से विजिलेंस अधिकारी जांच के लिए आते हैं, लेकिन उनकी कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह जाती है.
आरोप है कि राउरकेला के टिकट दलाल विजिलेंस को भी मैनेज कर लेते हैं. टिकट काउंटर पर चल रहा यह पूरा खेल सीसीटीवी में कैद होता है, लेकिन संबंधित अधिकारी उस पर कार्रवाई नहीं करते.
यात्रियों का कहना है कि जब आरपीएफ का नेतृत्व महानिदेशक सोनाली मिश्रा के हाथों में है, तो ऐसे मामलों में सख्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं.
जिम्मेदारी से बचते अधिकारी
इस मामले में सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने माना कि टिकट दलाल काउंटर पर सक्रिय रहते हैं. उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी समय-समय पर आरपीएफ को दी जाती है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती.
उन्होंने यह भी कहा कि टिकट दलालों पर कार्रवाई करना आरपीएफ का काम है. हालांकि विभागीय कर्मियों की संलिप्तता के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
पूरे प्रकरण में साफ है कि काउंटर पर दलालों का कब्जा है और मिलीभगत से यह अवैध कारोबार चल रहा है. लेकिन कार्रवाई की जिम्मेदारी लेने से अधिकारी बचते नजर आ रहे हैं, जिससे आम यात्री लगातार परेशान हैं.
सत्यजीत कुमार