झारखंड में सीएनटी-एसपीटी एक्ट को धता बताकर हजारों लोगों ने गलत तरीके से आदिवासियों की जमीन हड़पी है. ऐसे करीब 10 हजार मामले अभी भी कई अदालतों में लंबित हैं. वहीं इसे मुद्दा बनाकर सभी राजनीतिक दल अपनी रोटियां सेकते रहे हैं.
सूबे के भू-राजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा है कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन करनेवाले बड़े नेता अगर दोषी पाये जाते हैं, तो उनके भू-खंड भी खाली कराये जायेंगे. मंत्री ने स्पष्ट कहा कि कई बड़े आदिवासी नेताओं ने सीएनटी, एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर राज्य में जमीन खरीदी है. इन मामलों में अगर स्पेशल एरिया रेगुलेटरी एक्ट के तहत खाली कराने का आदेश आता है, तो सरकार उन भू-खंडों को खाली कराएगी.
एसपीटी-सीएनटी एक्ट में होगा संशोधन
बाउरी ने कहा कि सरकार जनहित में एसपीटी-सीएनटी एक्ट में संशोधन कर रही है. ताकि इन क्षेत्रों में कल्याणकारी योजनाएं जैसे सरकारी अस्पताल, विद्युत केंद्र वगैरह बनवाया जा सके. उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रावधान तो पहले से ही है.
दरअसल झारखंड में आदिवासियों की जमीन गलत तरीके से हथियाने में बड़े नेताओं, विधायकों के साथ-साथ राज्य के अधिकारी भी शामिल है. इनमें बाबूलाल मरांडी, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, स्टीफन मरांडी और प्रदीप बालमुचू जैसे दिग्गज नेताओं के रिश्तेदारों के नाम शामिल है. वैसे इस लिस्ट में पांच दर्जन से अधिक लोगों पर आरोप है.
मामले की जांच कर रही है SIT
मानसून सत्र के दौरान एसपीटी-सीएनटी एक्ट उल्लंघन के मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार पर अपने चहेतों को नाजायज फायदा पहुचाने के लिए इसमें संशोधन करने के लिए अध्यादेश लाने का आरोप लगाता रहा. जबकि आदिवासी जमीन की अवैध तरीके से खरीद के मामले में सभी दलों के नेता या उनके रिश्तेदार शामिल हैं. इतना ही नहीं झारखंड में कार्यरत उच्च पदों पर आसीन अधिकारी भी इस खरीद-फरोख्त में शामिल हैं. हालांकि जमीन के अवैध हस्तांतरण के मामले की जांच एसआईटी कर रही है.
क्या है सीएनटी/एसपीटी एक्ट 1908
सीएनटी यानि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 दरअसल छोटानागपुर और संथालपरगना में आदिवासी जमीन के अवैध तरीके से हो रहे खरीद फरोख्त को रोकने के लिए अंग्रेजो द्वारा बनाया गया था. हालांकि समय-समय पर इसमें संसोधन होते रहे हैं. यह एक्ट संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल है और यह ज्यूडिशल रिव्यू से बाहर है. सीएनटी एक्ट की धारा 46 के मुताबिक राज्य के छोटानागपुर और पलामू डिविजंस में एससी/एसटी या ओबीसी की जमीन सामान्य लोग नहीं खरीद सकते. वहीं इन जातियों के लोगों पर भी बिना उपायुक्त की अनुमति के अपने ही लोगों को जमीन हस्तांतरित करने या बेचने पर पाबंदी है.
केशव कुमार / धरमबीर सिन्हा