टूटे पुल से गुजर गई राजधानी एक्सप्रेस फिर रोकी गई मेमू ट्रेन, पुल पर से पैदल निकाले गए रेल यात्री

झारखंड के लोहरदगा में कोयल नदी पर बने क्षतिग्रस्त रेलवे पुल से राजधानी और सासाराम एक्सप्रेस गुजर गईं, जबकि खतरे की जानकारी मिलने पर मेमू ट्रेन को समय रहते रोक दिया गया. रेलवे कर्मियों ने यात्रियों को सुरक्षित ट्रेन से उतारकर पैदल पुल पार कराया. पुल के दो पिलर क्षतिग्रस्त पाए गए, जिसके बाद 7 जनवरी तक इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है.

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रेलवे पुल पर ट्रेन रोककर यात्रियों को पैदल भेजा गया (Photo: ITG) रेलवे पुल पर ट्रेन रोककर यात्रियों को पैदल भेजा गया (Photo: ITG)

सत्यजीत कुमार / सतीश शाहदेव

  • लोहरदगा,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:27 AM IST

झारखंड के लोहरदगा जिले में एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया. कोयल नदी पर बने रेलवे पुल के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद राजधानी एक्सप्रेस और सासाराम एक्सप्रेस के गुजर जाने के बाद रेलवे कर्मियों को खतरे का आभास हुआ. इसके बाद रांची से लोहरदगा आ रही मेमू ट्रेन को पुल से पहले ही रोक दिया गया, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ने से बच गई.

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जानकारी के अनुसार, कोयल नदी पर बने रेलवे पुल से राजधानी एक्सप्रेस और सासाराम एक्सप्रेस सुरक्षित गुजर चुकी थीं. इन ट्रेनों के गुजरने के बाद जब रेलवे स्टाफ ने पुल का निरीक्षण किया, तो पाया गया कि पुल के दो पिलर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. पुल का पांच नंबर पिलर पहले से मरम्मत के दौर से गुजर रहा था, लेकिन इसी दौरान उसमें नई दरारें दिखाई दीं. इसके साथ ही चार नंबर पिलर में भी दरार नजर आने लगी. इस स्थिति को देखते हुए रेलवे कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए. यदि इसी हाल में कोई और ट्रेन पुल से गुजरती, तो बड़ा हादसा हो सकता था.

इसी बीच रांची से चंदवा-टोरी जा रही मेमू ट्रेन संख्या 68027 लोहरदगा स्टेशन पहुंचने ही वाली थी. स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्थित कोयल नदी पुल के पास पहुंचने से पहले रेलवे कर्मियों को खतरे की पूरी जानकारी मिली. तत्परता दिखाते हुए रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल सिग्नल देकर मेमू ट्रेन को पुल के पहले ही रोक दिया. यदि यह ट्रेन पुल पर पहुंच जाती, तो सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी. रेलवे की सतर्कता ने एक बड़े हादसे को टाल दिया.

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ट्रेन रुकते ही यात्रियों में मची अफरा-तफरी

अचानक ट्रेन रुकने से यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई.  हालांकि रेलवे कर्मचारियों ने संयम और समझदारी से काम लेते हुए यात्रियों को स्थिति की जानकारी दी और उन्हें शांत कराया. यात्रियों को बताया गया कि पुल क्षतिग्रस्त है और सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन को आगे नहीं ले जाया जा सकता. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को ट्रेन से सुरक्षित उतारने का फैसला किया. रेलवे कर्मचारियों की देखरेख में सभी यात्रियों को एक-एक कर ट्रेन से नीचे उतारा गया. इसके बाद यात्रियों को रेलवे ट्रैक के सहारे पैदल ही पुल पार कराया गया और सुरक्षित रूप से लोहरदगा स्टेशन तक पहुंचाया गया. हालांकि इस दौरान यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी, लेकिन सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली कि एक बड़ा हादसा टल गया.

मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी, पुल पर परिचालन बंद

घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुल की स्थिति का निरीक्षण किया. तकनीकी टीम को तत्काल बुलाया गया, जिसने पुल के क्षतिग्रस्त पिलरों का प्रारंभिक आकलन किया. रेलवे प्रशासन ने एहतियातन कोयल नदी पुल पर सभी तरह के रेल परिचालन को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है. पुल की मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी होने तक किसी भी ट्रेन को इस रूट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इस रूट पर राजधानी एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का परिचालन 7 जनवरी तक रोक दिया गया है. राजधानी एक्सप्रेस को वैकल्पिक मार्ग बरकाकाना के रास्ते चलाया जाएगा. वहीं लोहरदगा-रांची-टोरी रूट पर चलने वाली मेमू ट्रेन को फिलहाल नागजुआ तक चलाया जा रहा है. इससे यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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रेल यातायात बाधित होने से लोहरदगा, रांची और आसपास के इलाकों के हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. यह रेल मार्ग दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अचानक ट्रेनों के रद्द या डायवर्ट होने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है.

दो दशक पुराना है पुल, बालू तस्करी पर सवाल

जिस पुल के दो पिलर क्षतिग्रस्त हुए हैं, वह रांची और लोहरदगा के बीच सबसे बड़ा रेलवे पुल माना जाता है. इसका निर्माण लगभग दो दशक पहले किया गया था, जब रांची-लोहरदगा रेल मार्ग का चौड़ीकरण किया गया था. प्रथम दृष्टया पुल में दरारें आने की वजह इसके आसपास से बड़े पैमाने पर बालू उठाव को माना जा रहा है. कोयल नदी से लंबे समय से भारी मात्रा में बालू की अवैध तस्करी की शिकायतें सामने आती रही हैं. 

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