झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम कुसुंबा में नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है. आयोग की अध्यक्षा विजया राहटकर ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम को हजारीबाग भेजा. आयोग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार और ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी जुटाई.
जांच के दौरान टीम ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. टीम के सदस्यों के अनुसार जब वे गांव पहुंचे तो कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं था, क्योंकि सभी कोर्ट गए हुए थे. इसके बावजूद टीम ने गांव में रहकर पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों से बातचीत कर तथ्यों को समझने का प्रयास किया.
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आयोग ने स्पष्ट किया कि इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेजी जाएगी. टीम का कहना है कि वह पूरे मामले की दोबारा जांच कर सभी पहलुओं का मूल्यांकन करेगी और उसके बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
आयोग का बयान और जांच की दिशा
आयोग की सदस्य ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि किसी भी बेकसूर व्यक्ति को इस मामले में न फंसाया जाए. टीम ने घटना से जुड़े सभी पक्षों की जानकारी एकत्र कर निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है. आयोग ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की सक्रियता के बाद इस घटना ने एक बार फिर पूरे इलाके में चर्चा तेज कर दी है. टीम ने ग्रामीणों से विस्तृत बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी हासिल की और पूरे मामले की गहराई से समीक्षा करने की बात कही.
अंधविश्वास में नाबालिग की बलि, तीन गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम कुसुंबा में हुई नाबालिग बच्ची की हत्या की गुत्थी सुलझा ली गई है. जांच में सामने आया कि झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चलते बच्ची की बलि दी गई थी. मृतका की मां ने अपने बेटे के स्वास्थ्य लाभ के लिए यह कदम उठाया था.
इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. गिरफ्तार आरोपियों में मृतका की मां रेशमी देवी, स्थानीय भीम राम और शांति देवी उर्फ भगतिनी शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.
विस्मय अलंकार