जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के खिलाफ जारी अभियान के दौरान एक पैरा कमांडो ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया. भारतीय सेना के अनुसार, हवलदार गजेंद्र सिंह, जो विशेष बलों से जुड़े थे, एक ग्रेनेड हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और इलाज के दौरान शहीद हो गए.
यह मुठभेड़ रविवार को चतरू क्षेत्र के सोनार गांव के पास हुई, जब सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच आमना-सामना शुरू हुआ. अचानक हुए ग्रेनेड हमले में आठ जवान घायल हुए, जिनमें से एक ने बाद में दम तोड़ दिया. इस अभियान को सेना ने 'ऑपरेशन ट्रशी-आई' नाम दिया है.
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने बताया कि इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान को और कड़ा कर दिया गया है. भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीमें ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद से आतंकियों की खोज में जुटी हैं.
तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने जंगल में एक संदिग्ध आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ किया, जहां सर्दियों के लिए राशन, बर्तन, गैस सिलेंडर और चूल्हा बरामद हुआ.
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अधिकारियों के मुताबिक, दो से तीन आतंकवादी जो पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं, अभी भी इलाके में छिपे हो सकते हैं.
सेना ने शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा याद रखी जाएगी. उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने भी उन्हें नमन किया.
यह इस साल जम्मू क्षेत्र में आतंकवादियों के साथ तीसरी मुठभेड़ है. गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ाई है ताकि किसी भी आतंकी साजिश को सफल न होने दिया जाए.
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