J&K बैंक भर्ती घोटाला: दो पूर्व चेयरमैन के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश, 3000 नियुक्तियों में धांधली का मामला

श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने जम्मू कश्मीर बैंक के दो पूर्व चेयरमैन और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवैध नियुक्तियों के मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है. आरोप है कि बैंक में लगभग 3,000 लोगों को पिछले दरवाजे से नौकरी दी गई थी, जिसकी जांच भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) ने की थी.

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जेएंडके बैंक के दो पूर्व चेयरमैन पर बैकडोर नियुक्ति करने का आरोप (फोटो: फाइल) जेएंडके बैंक के दो पूर्व चेयरमैन पर बैकडोर नियुक्ति करने का आरोप (फोटो: फाइल)

सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:20 PM IST

श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने जम्मू कश्मीर बैंक के दो पूर्व चेयरमैन और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवैध नियुक्तियों के मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है. आरोप है कि बैंक में लगभग 3,000 लोगों को पिछले दरवाजे से नौकरी दी गई थी, जिसकी जांच भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) ने की थी.

जम्मू और कश्मीर बैंक के दो पूर्व चेयरमैन, मुश्ताक अहमद शेख और परवेज अहमद नेनगुरु और अन्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय करने के आदेश जारी करते हुए अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने बैंक परिचारकों और सहायक बैंक सहयोगियों के पदों पर 3,000 अवैध नियुक्तियों की शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया था.

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जांच एजेंसी ने इस मामले में 2019 में FIR दर्ज कर गहन जांच की थी. अब अदालत ने मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने और आरोपियों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और रणबीर दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है.

दोनों पूर्व चेयरमैन पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलीभगत की और बैंक के भर्ती नियमों का उल्लंघन किया. आरोप है कि मुश्ताक अहमद शेख और परवेज अहमद नेगरू ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर ये अवैध नियुक्तियां कीं. इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी, जब औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे.

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) ने 2019 में एक शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करके इस मामले की जांच शुरू की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2014 से बैंक में बैंक परिचारकों और सहायक बैंक सहयोगियों के पदों पर लगभग 3,000 अवैध नियुक्तियां की गई थीं.

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जांच के दौरान, ACB ने पाया कि ये नियुक्तियां गुप्त रूप से की गई थीं. ACB ने यह भी पाया कि ये नियुक्तियां शुरू में 89 दिनों के लिए अस्थायी आधार पर की गई थीं और बाद में स्वीकृत रिक्तियों की कमी के बावजूद इन्हें नियमित कर दिया गया था.

इन नियुक्तियों के कारण बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ, क्योंकि इन अवैध कर्मचारियों को वेतन देने में लाखों रुपये खर्च हो गए. बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जम्मू और कश्मीर बैंक एक निजी संस्था है और बैंक अधिकारी जम्मू और कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अधीन नहीं हैं. हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया और अगली सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया.

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