J&K बैंक भर्ती घोटाले में दो पूर्व चेयरमैन दोषी करार, 3000 नियुक्तियों में धांधली का मामला

श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने जम्मू-कश्मीर बैंक के दो पूर्व चेयरमैनों और कुछ अन्य अधिकारियों को अवैध नियुक्तियों के मामले में दोषी पाया है. बैकडोर एंट्री के जरिए करीब 3000 लोगों को बैंक में नौकरी दी गई थी, जिसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने की थी.

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J&K बैंक भर्ती घोटाले में दो पूर्व चेयरमैन दोषी करार. (Photo: ITG) J&K बैंक भर्ती घोटाले में दो पूर्व चेयरमैन दोषी करार. (Photo: ITG)

सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:16 AM IST

श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने जम्मू-कश्मीर बैंक के दो पूर्व चेयरमैन मुश्ताक अहमद शेख और परवेज अहमद नेंगुरू समेत कुछ अधिकारियों को बैंक में बैकडोर नियुक्तियां करने का दोषी ठहराया है. एंटी-करप्शन ब्यूरो ने बैंक अटेंडेंट और असिस्टेंट बैंक एसोसिएट्स के पदों पर हुई 3000 अवैध नियुक्तियों की शिकायत मिलने के बाद ये मामला दर्ज किया था.

जांच एजेंसी ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर गहन तफ्तीश की थी. अब अदालत ने इन अधिकारियों के खिलाफ आरोपों को सही पाया है. अदालत ने आदेश दिया है कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अगली सुनवाई में औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएंगे.

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भर्ती नियमों की अनदेखी

अदालत के आदेश के अनुसार, दोनों पूर्व चेयरमैनों ने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बैंक में भर्ती के नियमों को ताक पर रखा था. अदालत ने पाया कि आरोपी मुश्ताक अहमद शेख (तत्कालीन चेयरमैन) और परवेज अहमद नेग्रू (उनके बाद चेयरमैन) ने अन्य अधिकारियों के साथ साजिश रचकर इन अवैध नियुक्तियों को अंजाम दिया. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री मौजूद है जो आरोप तय करने और ट्रायल के लिए पर्याप्त है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी, जिसमें औपचारिक रूप से आरोप फ्रेम किए जाएंगे.

2019 में एंटी करप्शन ने शुरू की जांच

बता दें कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक शिकायत के आधार पर साल 2019 में एक एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शूरू की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि साल 2014 में बैंक में बैंक अटेंडेट और असिस्टेंट बैंक एसोसिएट्स के पदों पर लगभग 3000 अवैध नियुक्तियां की गई हैं.

शिकायत में ये भी बताया गया कि इनमें से 100 से अधिक नियुक्तियां पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के कार्यकर्ताओं को दी गई थीं.

ACB को जांच के दौरान पता चला कि बैंक के तत्कालीन चेयरमैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर बिना वैकेंसी की पहचान किए, विज्ञापन जारी किए बिना और ऑफिसर्स सर्विस मैनुअल 2000 के नियमों का पालन किए बिना कई लोगों को नियुक्त किया. इन नियुक्तियों से बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ, क्योंकि इन अवैध कर्मचारियों को वेतन देने में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं.

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