'मेरे जनाजे को कंधा दे देना...', आतंकी बेटे से सरेंडर की गुहार लगाती 80 साल की मां का निधन

जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में 80 वर्षीय जन्ना बेगम का निधन हो गया, जिन्होंने अपने बेटे रियाज अहमद से आतंकवाद छोड़कर सरेंडर करने की अपील की थी. रियाज हिजबुल मुजाहिदीन का 'ए-प्लस' कैटेगिरी कमांडर है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम है.

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मां की आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी. (Representational Photo) मां की आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी. (Representational Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

जम्मू-कश्मीर में सोशल मीडिया पर अपने बेटे से आतंकवाद छोड़ने की अपील करने वाली महिला का निधन हो गया है. ये मामला किश्तवार जिले के मरवाह क्षेत्र में अनियार गांव का है.

पीटीआई के मुताबिक, 80 साल की जन्ना बेगम अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में अपने बेटे से उनकी देखभाल करने के लिए कहती रहीं. उन्होंने अपने बेटे से हिंसा छोड़कर सरेंडर करने के लिए कहा था लेकिन उनकी अंतिम इच्छा पूरी न हो सकी.

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बता दें कि रियाज अहमद हिजबुल मुजाहिदीन का 'ए-प्लस' कैटेगिरी का कमांडर है. उसे सुरक्षा बलों ने वॉन्टेड घोषित किया है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम है.

अपने बेटे से सरेंडर की अपील करती रहीं मां

जन्ना बेगम ने पिछले साल नवंबर और दिसंबर में सोशल मीडिया पर वीडियोज जारी किए थे. इनमें वो अपने बेटे रियाज अहमद कहती दिखी थीं, 'उसे सरेंडर कर देना चाहिए और वापस आकर हमारी देखभाल करनी चाहिए. कम से कम उसे हमारे जिंदा रहते हुए यहां होना चाहिए और मेरी लाश को कंधा देना चाहिए.'

जन्ना बेगम ने आतंकवाद को लेकर कहा था, 'ये किस तरह का जिहाद है जहां मां-बाप को छोड़ दिया जाता है? हम अकेले हैं. हमारी देखभाल कौन करेगा?'

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अधूरी रह गई मां की आखिरी ख्वाहिश

एक करीबी रिश्तेदार ने बताया कि लाख गुजारिशों के बावजूद जन्ना बेगम का बेटा घर नहीं लौटा और वो अपने बेटे को देखे बिना ही चल बसीं. रिश्तेदार ने कहा, 'उनकी अंतिम इच्छा अधूरी ही रह गई.'

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि परिवारों की ऐसी अपीलें आतंकवाद के खिलाफ बदलती जनभावना का सबूत हैं. अधिकारी ने कहा, आतंकवाद देश के लिए अच्छा नहीं है. जो लोग हथियार उठाते हैं उन्हें या तो मौत या जेल का सामना करना पड़ता है. अगर वो अपने माता-पिता की बात सुनकर सरेंडर कर देता है, तो ये एक अच्छा कदम होगा.

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कौन है रियाज अहमद?

रियाज अहमद लगभग 15 साल पहले आतंकवादी संगठनों में शामिल हुआ था. माना जाता है कि वो क्षेत्र में सक्रिय हिजबुल के सबसे लंबे समय तक जिंदा रहने वाले कमांडरों में से एक से है.

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