J-K: एलजी मनोज सिन्हा का बड़ा एक्शन, लश्कर और हिजबुल से जुड़े 2 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सरकारी मशीनरी से आतंकवाद के 'कैंसर' को जड़ से उखाड़ने का अपना वादा दोहराया है. आजतक के सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को आतंकी संबंधों के चलते दो और सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई.

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जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधि में शामिल 2 कर्मचारियों पर एक्शन (Representational Image/File) जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधि में शामिल 2 कर्मचारियों पर एक्शन (Representational Image/File)

सुनील जी भट्ट

  • जम्मू,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:31 PM IST

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को आतंकी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से जुड़े दो सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया. आजतक के सूत्रों के जरिए यह जानकारी मिली है. यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत सरकारी मशीनरी में पैठे आतंकी तत्वों को बाहर निकालने के अभियान के तहत की गई है. बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में रामबन के शिक्षा विभाग का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फरहत अली खांडे और बांदीपोरा के ग्रामीण विकास विभाग का मोहम्मद शफी डार शामिल हैं. 

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सुरक्षा एजेंसियों ने इन पर आतंकी नेटवर्क चलाने, फंड जुटाने और सुरक्षा बलों की जानकारी साझा करने के गंभीर सबूत पाए हैं. 

एलजी ने आतंकवाद के इस खतरे को पूरी तरह खत्म करने की कसम खाई है. अब तक इस कैंपेन के तहत 90 से ज्यादा कर्मचारी सेवा से बाहर किए जा चुके हैं.

शिक्षा विभाग की आड़ में नेटवर्क

रामबन में शिक्षा विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फरहत अली खांडे की असलियत साल 2011 में सामने आई थी. वह हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था और अपनी सरकारी नौकरी का उपयोग आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कवर के रूप में करता था. फरहत का नाम पहली बार तब उछला, जब एक पकड़े गए आतंकी ने खुलासा किया कि वह मारे गए आतंकियों के परिवारों को हवाला का पैसा बांटने में शामिल था. 

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साल 2011 में जेल जाने और फिर जमानत मिलने के बाद भी उसकी आतंकी गतिविधियां जारी रहीं. साल 2022 में उसके खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की गई थी. वह सरकारी खजाने से वेतन लेकर आतंकियों के लिए एक बड़े सूत्रधार के रूप में काम कर रहा था.

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बांदीपोरा के मोहम्मद शफी डार को उसके पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर ग्रामीण विकास विभाग में नौकरी मिली थी. हालांकि, उसने इस दया का बदला गद्दारी से दिया और लश्कर-ए-तैयबा के लिए एक्टिव आतंकी सहयोगी के रूप में काम करने लगा. शफी आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने, उनके आने-जाने की व्यवस्था करने और सुरक्षा बलों की संवेदनशील जानकारी साझा करने में शामिल था. 

अप्रैल 2025 में एक नियमित नाका चेकिंग के दौरान शफी और उसके साथी को एक एके-56 राइफल और ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया गया था. जांच में पता चला कि वह सुरक्षा बलों पर हमला करने की साजिश भी रच रहा था.

आतंकवाद को जड़ से मिटाने का संकल्प

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि जब तक सरकारी मशीनरी से आतंक का आखिरी धागा भी नहीं टूट जाता, वे चैन से नहीं बैठेंगे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता से वादा किया है कि हर आतंकी को बिना किसी अपवाद और बिना किसी दया के ढूंढ निकालकर खत्म किया जाएगा. 

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