जम्मू-कश्मीर: गुर्जर-बकरवाल समुदाय के लिए क्यों सीटें आरक्षित करना चाहती है बीजेपी?

भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जम्मू-कश्मीर में गुर्जर और बकरवाल समुदाय के लिए एसटी की सीटें आरक्षित करने की बात कही है. इस दांव के जरिए बीजेपी ये मकसद साधने की तैयारी में है.

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BJP नेता नड्डा ने जम्मू-कश्मीर में बकरवाल समुदाय के लिए सीटें आरक्षित करने की बात कही है. (फोटो-PTI) BJP नेता नड्डा ने जम्मू-कश्मीर में बकरवाल समुदाय के लिए सीटें आरक्षित करने की बात कही है. (फोटो-PTI)

नवनीत मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

  • जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद होंगे विधानसभा चुनाव
  • घाटी और जम्मू में बकरवाल समुदाय के लिए आरक्षित होंगी सीटें
  • सीटों के आरक्षण के जरिए 12 लाख की आबादी पर बीजेपी की नजर

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में एसटी कोटे की सीटें गुर्जर और बकरवाल समुदाय के लिए आरक्षित करने की तैयारी की है. भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार(15 सितंबर) को महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान इसके संकेत दिए. उन्होंने ठाणे में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद चुनाव होगा. यह भी कहा कि भले ही जम्मू और कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया है, मगर उसे विधायिका की शक्ति है. उन्होंने, घाटी और जम्मू में एसटी की सीटें गुर्जरों और बकरवालों के लिए आरक्षित करने की योजना का भी खुलासा किया. माना जा रहा है कि बीजेपी की ओर से सीटों को आरक्षित करने की तैयारी, राज्य में जनाधार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है.

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12 लाख की आबादी पर फोकस

जम्मू-कश्मीर में गुर्जर-बकरवाल एक घुमंतू जाति है. खानाबदोश होते हैं. रहने के ठिकाने बदलते रहते हैं. वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में करीब 12 लाख गुर्जर-बकरवाल समुदाय के लोग रहते हैं. यूं तो बकरवाल भी गुर्जर समुदाय में ही आते हैं, मगर समुदाय में बाकियों से वे कुछ मजबूत होते हैं. बकरियों, पशुओं के साथ जम्मू-कश्मीर में विचरण करते रहते हैं.

जम्मू-कश्मीर में गुर्जर-बकरवाल समुदाय की कुल 11 प्रतिशत आबादी है. सीमा पर युद्ध के समय कई मौकों पर बकरवाल समुदाय के लोग सेना की आंख और कान बने रहे. घुमंतू होने पर सीमा पर घुसपैठ की जानकारी बकरवाल समुदाय को होती है तो फौरन सेना को अलर्ट करते हैं.

यहां तक कि कारगिल युद्ध जब हुआ था, उस दौरान भारतीय सीमा में पाकिस्तानी सैनिकों के घुसने की सबसे पहले खबर बकरवाल समुदाय के लोगों ने ही भारतीय सेना को दी थी. सूत्र बताते हैं कि घाटी में अलगाववादी तत्वों से बकरवाल समुदाय के लोग इत्तफाक नहीं रखते. ऐसे में बीजेपी की नजर इस देशभक्त समुदाय के  वोटबैंक पर है.

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चूंकि 1991 से बकरवाल समुदाय को आदिवासी जाति का दर्जा मिल चुका हैं. ऐसे में बीजेपी ने अनुसूचित जनजाति(एसटी) वर्ग की सीटें गुर्जर-बकरवाल समुदाय के लिए आरक्षित करने की बात कहकर बड़ा दांव खेला है.

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