370 हटने के बाद से ऐसे हैं कश्मीर के हालात, जानिए क्या कहते हैं वहां के छात्र?

चार दिन बाद भी घाटी में टेलीफोन बंद है. इंटरनेट बंद है. लोग घरों में बंद हैं. धारा 144 लागू है. लोग परेशान हैं क्योंकि बाहर की कोई आहट उनको नहीं आ पा रही है. जो उनके अपने बाहर हैं, उनकी कोई खबर मिल नहीं रही.

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जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल (फाइल फोटो- रॉयटर्स) जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST

कश्मीर में धारा 370 के दफ्न होने के बाद पसरा सन्नाटा बहुत कुछ कहता है. इसे शांति की तरफ बढ़ा कदम माना जाए या दहशत की दूसरी तस्वीर. लेकिन, जैसे-जैसे वुक्त गुजर रहा है चीजों को पहले जैसी करने की कोशिश हो रही है. हालांकि, चार दिन बाद भी घाटी में टेलीफोन बंद है. इंटरनेट बंद है. लोग घरों में बंद हैं. धारा 144 लागू है. लोग परेशान हैं क्योंकि बाहर की कोई आहट उनको नहीं मिल रही है. जो उनके अपने बाहर हैं, उनकी कोई खबर मिल नहीं रही.

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आजतक से बात करते हुए एक महिला ने कहा कि बहुत ज्यादा तबाही हो गई. बहू बाहर है. लड़का भी बाहर, किसी के फोन का कुछ पता नहीं है. पहले आतंक के गोलों का डर था, अब नई उम्मीद से पहले अनहोनी सता रही है. ये शिकायत कमोबेश हर कश्मीरी की है कि फोन बंद होने से उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है.

घाटी में रहने वालों के लिए ये शादी-ब्याह के जश्न का मौसम है, लेकिन धारा 370 के खात्मे का असर शादी ब्याह पर भी पड़ रहा है. इस बीच लोग अखबारों में इश्तहार देकर न्योता को कैंसिल कर रहे हैं. जहां शादियां हो रही हैं, वहां मेहमान नहीं पहुंच पा रहे.

तमिलनाडु में पढ़ रहे जम्मू के छात्र बिगड़े हालात के बीच घर जाना चाहते हैं. छात्रों ने आजतक से बातचीत में बताया कि हम अपने घर जाना चाहते हैं. हम अपने परिवार से मिलना चाहते हैं, हमने कौन सा पाप किया है, जो हमें रोका जा रहा है. छात्रों का दर्द अपनी जगह है लेकिन जम्मू से कश्मीर तक कई लोगों के मन में एक अनहोनी की आशंका है. वहां के एक बुजुर्ग ने कहा कि गवर्नर ने कहा था कि कुछ नहीं होगा लेकिन सब कुछ कर दिया.

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वैसे ही जम्मू आईआईटी के छात्रों को भी लगता है कि जम्मू-कश्मीर के राज्य की जगह केंद्र शासित प्रदेश बनने से कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने आजतक से बातचीत में बताया कि उन्हें कोई टेंशन नहीं है, हम मस्ती में हैं. घाटी में पिछले 30 वर्षों से आतंक का एक खौफ है. आतंक के उस खौफ से सूबे को निकालने की पहल सरकार ने की तो लोगों को एक नया डर सता रहा है.

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