बुरहान के खात्मे के बाद सेना ने कश्मीर की रणनीति में किए ये 5 बड़े बदलाव

हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी का सेना ने एक साल पहले खात्मा किया था. बुरहान की पहली बरसी के मौके पर घाटी में तनाव की आशंका के चलते कश्मीर घाटी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. वहीं प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को भी एक दिन के लिए रोक दिया है. बुरहान के खात्मे के बाद से सेना ने कश्मीर में आतंक के खात्मे के लिए अपनी रणनीति में ये 5 बड़े बदलाव किए हैं-

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हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की मौत को हुआ एक साल हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की मौत को हुआ एक साल

केशवानंद धर दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी का सेना ने एक साल पहले खात्मा किया था. बुरहान की पहली बरसी के मौके पर घाटी में तनाव की आशंका के चलते कश्मीर घाटी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. वहीं प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को भी एक दिन के लिए रोक दिया है. बुरहान के खात्मे के बाद से सेना ने कश्मीर में आतंक के खात्मे के लिए अपनी रणनीति में ये 5 बड़े बदलाव किए हैं-

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1. ऑपरेशन ऑलआउट- 258 आतंकियों की लिस्ट, इस साल अब तक 96 ढेर

एक साल पहले मुठभेड़ में सेना ने हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी को मार गिराया था. इसके बाद कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सेना ने कई एक्शन लिए हैं. घाटी से आतंक का खात्मा करने के लिए 'ऑपरेशन ऑलआउट' शुरू किया गया है. जिसमें सुरक्षाबलों ने कश्मीर में सक्रिय 258 आतंकियों की लिस्ट तैयार की है. इसमें पाकिस्तानी और स्थानीय दोनों आतंकियों को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. इस लिस्ट में लश्कर-ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और अल बद्र जैसे संगठनों से जुड़े आतंकी चिन्हित किए गए हैं. खुफिया एजेंसियों ने मिलकर इन आतंकियों की ये सूची तैयार की. इस सूची में जम्मू-कश्मीर के 13 जिलों के आतंकी शामिल किए गए हैं. इस साल अबतक सब्जार बट, बशीर लश्करी समेत 96 आतंकी ढेर किए जा चुके हैं.

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2. कासो, दक्षिण कश्मीर के गांवों से लेकर श्रीनगर के लालचौक पर भी चला सर्च ऑपरेशन

घाटी से आतंक के खात्मे के लिए सेना ने जम्मू कश्मीर के लाल चौक में तलाशी अभियान (CASO) शुरू किया था. 15 साल बाद फिर से शुरू हुए इस ऑपरेशन में सेना घेरा डालो और तलाशी लो के मोड में काम करती है. इस ऑपरेशन में हजारों सैनिक शामिल होते हैं. सोपोर से लेकर श्रीनगर के लालचौक पर सेना ये ऑपरेशन चला चुकी है.

जानें क्या है CASO

जम्मू कश्मीर में बढ़ते तनाव के बीच घाटी में आतंकवाद के खात्मे के लिए सेना ने यह अभियान चलाया. घाटी में 15 साल बाद सेना ने 'कासो' का फिर से इस्तेमाल शुरू किया था. कासो का मतलब ‘घेरा डालना और तलाशी अभियान' है. शोपियां, त्राल समेत दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सेना ने कासो के जरिए आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था.

3. बॉर्डर पर घुसपैठियों का खात्मा और उनको मदद देने वाले पाकिस्तानी पोस्टों पर कार्रवाई

पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ रोकने पर भी सेना ने फोकस किया है. इसके लिए एलओसी पर घुसपैठियों को मारने के साथ-साथ उन्हें मदद कर रही पाकिस्तान सैन्य चौकियों को भी ध्वस्त करने का अभियान चलाया गया है. पिछले साल इंडियन आर्मी ने पीओके में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था. इस बार भारी हथियारों की बदौलत सीमा पार कई पाकिस्तानी चौकियों के नष्ट किया गया. सेना ने इसका खुला ऐलान किया और पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तानी चौकियों की मदद से घुसपैठ कराई गई तो और एक्शन होंगे.

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4. सेना प्रमुख की दो टूक- आतंकियों का साथ देने वाले भी आतंकी माने जाएंगे

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने पाकिस्तान को दो टूक संदेश दिया था. साथ ही कश्मीर में अलगाववाद और पत्थरबाजों को भी उन्होंने सीधी चुनौती दी. सेना प्रमुख ने साफ ऐलान किया कि आतंकियों के सहयोग के लिए पत्थरबाजी करने वालों को भी आतंकी मानकर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत आई तो अपनी ताकत का इस्तेमाल करने में कभी पीछे नहीं हटेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकवादियों का साथ देने वाले भी आतंकी ही माने जाएंगे.

5. साउथ कश्मीर पर स्पेशल फोकस, 2000 जवान भेजे जाएंगे.

आतंकियों की ज्यादा सक्रियता दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा, सोपोर, त्राल आदि इलाकों में देखी गई है. इसके मद्देनजर सेना इन इलाकों में 2000 और सैनिकों को भेजने जा रही है. इन सैनिकों को आतंकियों के खात्में में लगाया जाएगा.

बता दें कि 8 जुलाई, 2016 को घाटी में सुरक्षा बलों के साथ हुए मुठभेड़ में हिज्बुल आतंकी बुरहान मारा गया था. उसकी मौत के बाद वहां हिंसा भड़क उठी थी और महीनों तक घाटी का माहौल खराब रहा था.

 

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