हिमाचल प्रदेश में पैसे की तंगी के बीच मंत्रियों-विधायकों की सैलरी में होगी कटौती

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक दबाव के चलते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने समेत मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी का एक हिस्सा 6 महीने के लिए टालने का फैसला किया है. हालांकि, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को पूरी सैलरी मिलेगी. वहीं सरकार ने मेडिकल स्टाफ, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित कई वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी की है. विधायक योजनाओं की सीमा भी बढ़ाई गई है. सरकार का कहना है कि हालात सुधरने पर रोकी गई राशि वापस दी जाएगी.

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ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा. (File Photo: ITG) ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • शिमला,
  • 21 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:52 PM IST

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के आर्थिक दबाव के बीच बड़ा फैसला लेते हुए अपने समेत मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा अस्थायी रूप से न लेने की घोषणा की है. यह ऐलान 2026-27 के बजट पेश करते समय किया गया. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यह सिर्फ अस्थायी कदम है और जैसे ही राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, रोकी गई राशि वापस कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यह फैसला वित्तीय दबाव को देखते हुए लिया गया है.

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बजट के मुताबिक, मुख्यमंत्री की सैलरी का 50 प्रतिशत, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की सैलरी का 30 प्रतिशत और विधायकों की सैलरी का 20 प्रतिशत अगले 6 महीनों के लिए टाला गया है.

इसके अलावा आयोगों, बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सलाहकारों की सैलरी में भी 20 प्रतिशत की कटौती लागू होगी. वरिष्ठ अधिकारियों जैसे मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों की सैलरी में 30 प्रतिशत की रोक लगाई गई है.

वहीं सचिव स्तर के अधिकारी, विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सैलरी में 20 प्रतिशत और ग्रुप-ए व ग्रुप-बी अधिकारियों की सैलरी में 3 प्रतिशत की अस्थायी कटौती की गई है.

निचले कर्मचारियों को पूरी राहत
सरकार ने साफ किया है कि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्हें पूरी सैलरी मिलती रहेगी. यह फैसला खास तौर पर निचले स्तर के कर्मचारियों को राहत देने के लिए लिया गया है.

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कई वर्गों को मिला लाभ
आर्थिक संकट के बावजूद सरकार ने कई वर्गों के लिए राहत की घोषणा भी की है. अस्थायी मेडिकल अधिकारियों की सैलरी 33,600 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दी गई है. स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और ऑपरेशन थिएटर टेक्नीशियन की सैलरी को एक समान 25,000 रुपये कर दिया गया है. दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. मिड-डे मील वर्कर, जल रक्षक, पंचायत चौकीदार और अन्य कर्मचारियों के मानदेय में 500 रुपये प्रति माह बढ़ाए गए हैं.

विधायक योजनाओं की सीमा बढ़ी
मुख्यमंत्री ने विधायक प्राथमिकता योजनाओं की सीमा 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 225 करोड़ रुपये प्रति विधानसभा क्षेत्र करने की घोषणा भी की है. बजट पेश करने के दौरान मुख्यमंत्री इस बार अपनी पारंपरिक कार की जगह इलेक्ट्रिक वाहन से विधानसभा पहुंचे. उनका बजट भाषण करीब चार घंटे तक चला.

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