'पद्मावती' पर हरियाणा BJP में जंग, सूरजपाल अमू ने दिया इस्तीफा

'पद्मावती' को लेकर विवादित बयानबाजी से सुर्खियों में आए बीजेपी नेता सूरजपाल अमू एक बार फिर सुर्ख‍ियों में हैं. राजपूत समाज को मिलने का समय देकर ना मिलने पर हरियाणा सीएम से नाराज सूरजपाल ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

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सूरजपाल अम्मू सूरजपाल अम्मू

वंदना भारती / सतेंदर चौहान

  • चंडीगढ़,
  • 29 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 1:10 PM IST

संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' पर विवादित बयान देकर लगातार विवादों में रहने वाले हरियाणा भाजपा के मीडिया कोऑर्डिनेटर सूरजपाल अमू एक बार फिर सुर्ख‍ियों में हैं.  भंसाली और दीपिका का सिर काटने वाले पर 5 करोड़ का इनाम देने के विवादास्पद बयान पर पार्टी से नोटिस पा चुके सूरजपाल अमू ने हरियाणा प्रदेश मीडिया संपर्क के पद से इस्तीफा दे दिया है.

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को लेकर विवादित बयानबाजी से सुर्खियों में आए बीजेपी नेता ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को जो इस्तीफा पत्र भेजा है, उसमें लिखा है कि मनोहरलाल खट्टर को अब उनकी जरूरत नहीं है.  मीडिया संपर्क के पद पर रहते हुए उन्होंने अपना काम बेहद ईमानदारी से किया, बावजूद इसके सीएम ने उनकी कद्र नहीं की.

के व्यवहार से दुखी यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि मनोहरलाल खट्टर को अब समर्पित व निष्ठावान कार्यकर्ताओं की आवश्यकता ही नहीं है.

पढ़ें पत्र का अंश...

माननीय सुभाष बराला जी, प्रदेशाध्यक्ष

भाजपा, हरियाणा, मैं , भाजपा प्रदेश मीडिया सम्पर्क प्रमुख, कल राजपूत समाज के साथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी द्दारा किए गए व्यवहार से व्यथित हूं. सगंठन ने जो सम्मान व पद मुझे दिया और सगंठन ने जो भी कार्य मुझे दिया, वो मैंने दिल से किया. हरियाणा के ही नहीं अपितु केन्द्र के अनेकों अनेक वरिष्ठ नेताओं के साथ 28 वर्षों से सगंठन के अनेकों पदों पर रहते हुए कार्य करने का अवसर भाजपा ने मुझे दिया. प्रदेश भाजपा सगंठन में, प्रत्येक कार्य को जो भी आपने मुझे सौंपा वो मैंने मेहनत और लगन से किया.  

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मुझे यह महसूस हो रहा है कि को अब समर्पित व निष्ठावान कार्यकर्ताओं की व पदाधिकारियों की आवश्यकता नहीं है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी के इर्दगिर्द कुछ अवांछित लोगों का एक समूह है, जो उन्हें भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं से पिछले तीन वर्षों से दूर कर रहा है. भगवान उन्हें सदबुद्धि प्रदान करें. मुझे उम्मीद है कि आप मेरे इस संदेश को ही मेरा इस्तीफा समझेंगे और इसे मंजूर करेंगे. भाजपा में साधारण कार्यकर्ता के रूप में कार्य करता रहूंगा.

आपका अपना 'सूरजपाल अमू'.

क्या था पूरा मामला:

दरअसल, फिल्म पर बढ़े विवाद को लेकर मंगलवार को हरियाणा के और राजपूत करणी सेना की मुलाकात होनी थी, जो नहीं हो पाई. इस पर नाराज सूरजपाल अमू ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल पर हमला बोलते हुए इसे राजपूत बिरादरी का अपमान करार दे दिया है. अमू की नाराजगी की वजह थी समय देने के बावजूद खट्टर का पद्मावती को लेकर करणी सेना से मुलाकात न करना.

अमू ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करता हूं कि वो खट्टर से बात करें और पूछें कि उन्होंने उनसे मिलने आए राजपूत समाज के प्रतिनिधिमंडल का अपमान क्यों किया. मुख्यमंत्री ने खुद ही इसके लिए समय दिया था और वे बिना मुलाकात के चले गए. वो उन लोगों से क्यों नहीं मिले, जो राजस्थान से उनसे मिलने आए थे. अगर वो हमें पार्टी से बाहर करना चाहते हैं तो करें, लेकिन हमारी बेइज्जती न करें.

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अमू यहीं नहीं रुके और कहा कि सीएम हमारे साथ ऐसा बर्ताव नहीं कर सकते. मैं मुख्यमंत्री के श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह के प्रति व्यवहार की निंदा करता हूं. मैं बीजेपी के साथ नहीं रहना चाहता, क्योंकि वो अप्रत्यक्ष रूप से हमारी बेइज्जती कर रहे हैं.

अमू ने खट्टर पर वार करते हुए कहा कि मैं उनके साथ पिछले 22 साल से काम कर रहा हूं. मैं उनके बारे में हर चीज विस्तार से जानता हूं. वो खुद राजपूतों के गांव से हैं. उन्हें देश को अपने बदले हुए व्यवहार के बारे में बताना होगा. जाट, सैनी और बाकी के तकरीबन सभी समुदाय उनके खिलाफ हैं. फिर भी हम उनके साथ शुरुआत से हैं. लेकिन अब मुझे लगता है कि उन्हें हमारी और जरूरत नहीं है. जब फिल्म राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात में बैन है तो हरियाणा सरकार उस पर बंदिश क्यों नहीं लगा रही. उन्हें आखिर किसका इंतजार है.

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