देश में सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल अधिकतर लोगों की इसलिए मौत हो जाती है क्योंकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में देर हो जाती है. पुलिस की पूछताछ के डर से अक्सर लोग घायलों को अस्पताल पहुंचाने से कतराते हैं. हरियाणा के जींद में एक जज साहब ने सड़क हादसे में घायल 4 लोगों को अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया. लेकिन ऐसा करते वक्त जज साहब को जो अनुभव हुआ, वो उनके लिए हैरान कर देने वाला था.
सीबीआई कोर्ट पंचकूला के एडिशनल सेशंस जज जगदीप सिंह परिवार के साथ अपने वाहन से जा रहे थे. जींद के इक्कस गांव के पास उन्होंने सड़क हादसे में घायल 4 लोगों को देखा तो तत्काल 102 नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया. पहले तो मुश्किल से नंबर मिला और नंबर मिला भी तो दूसरी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. कुछ देर इंतजार करने के बाद जज ने फिर फोन किया तो एंबुलेंस के कंट्रोल रूम से बैठे कर्मचारी ने जवाब दिया कि 'एंबुलेंस उड़कर नहीं आ जाएगी, आराम से आएगी.'
ऐसा जवाब सुनकर हैरान जज ने खुद ही घायलों को सिविल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की. इस दौरान घायल एक युवक की मौत हो गई. फिर उन्होंने सिविल सर्जन को इसकी शिकायत की. मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए हैं.
खुशदीप सहगल