गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची के रेप के मामले में पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट इस बात से भी नाराज दिखा कि मजिस्ट्रेट ने जब बच्ची का बयान दर्ज किया था, तब आरोपी उसके बेहद नज़दीक खड़ा था. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि जिस तरीके से हरियाणा पुलिस ने जांच की है वो बेहद असंवेदनशील और परेशान करने वाली है.
पीठ ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को पूरे रिकॉर्ड के साथ बुधवार को पेश होने का आदेश दिया. कोर्ट ने हरियाणा सरकार के AAG से पूछा है कि उनके कैडर में कितनी महिला पुलिस अधिकारी हैं? कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की जांच गुरुग्राम पुलिस के बजाए CBI या SIT से कराए जाने की बच्ची के माता पिता की मांग पर नोटिस जारी किया है.
पीठ ने गुरुग्राम पुलिस से भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. इसके अलावा कोर्ट ने गुरुग्राम के सेशन कोर्ट से कहा है कि वो उस ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण ले जिसने बच्ची का बयान दर्ज किया था. कोर्ट ने इसकी जानकारी सीलबंद लिफाफे में देने को कहा है.
कोर्ट ने बच्ची के माता पिता के हलफनामे को भी सीलबंद रखने को कहा है. फिलहाल कोर्ट 25 मार्च बुधवार को इस मामले पर अगली सुनवाई करेग.
दरअसल गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची से रेप के मामले की सीबीआई या विशेष जांच दल यानी एसआईटी से कराए जाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है. ये संवेदनशील मामला शुक्रवार को वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने CJI के सामने मेंशन करते हुए इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने की मांग की थी.
उस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया था एक भयानक हादसा है. इस मामले में बच्ची ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया है. जहां उसने पूरी घटना की जानकारी दी, बावजूद इसके गुरुग्राम पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई और घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया गया, कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं लिया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर आज सुनवाई के लिए सहमति दी थी.
संजय शर्मा